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महंगाई से बचने के लिए कंपनियों की नई चाल, ‘श्रिंकफ्लेशन’!

-कीमत वही, पैकेट में सामान कम

रामदिनेश यादव / मुंबई
महंगाई से परेशान आम जनता को आनेवाले दिनों में एक और झटका लग सकता है। रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल खाद्य तेल, साबुन, चाय, बिस्किट समेत कई एफएमसीजी उत्पादों की कीमतें बढ़ने की तैयारी में हैं। हालांकि, कंपनियां सीधे कीमत बढ़ाने के बजाय उपभोक्ताओं को एक बार फिर ‘श्रिंकफ्लेशन’ का झटका देने की तैयारी कर रही हैं। यानी कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में सामान कम मिलेगा।
देश में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी एफएमसीजी की कीमतों पर एक बार फिर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रमुख एफएमसीजी कंपनियां जुलाई से सितंबर २०२६ की सितंबर तिमाही में अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। कंपनियों का तर्क है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत ने उनके लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ा दिया है।
चीनी-पाम ऑयल ने बढ़ाई चिंता
कंपनियों के अनुसार, चीनी, पाम ऑयल और अन्य प्रमुख कच्चे माल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर उत्पाद बेचना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में लागत का बोझ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ पैकेजिंग और उत्पाद की मात्रा में बदलाव का सहारा लिया जा सकता है।
कीमत वही, पैकेट छोटा!
कंपनियों के लिए सीधे कीमत बढ़ाना जोखिम भरा होता है, क्योंकि कीमत बढ़ते ही उपभोक्ता सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इसलिए ‘श्रिंकफ्लेशन’ कंपनियों के लिए एक आसान रास्ता बन जाता है। इसमें उत्पाद की कीमत पहले जैसी ही रखी जाती है, लेकिन पैकेट में मिलनेवाली मात्रा घटा दी जाती है।
आम आदमी की जेब पर दोहरी मार
खाद्य तेल, चाय, बिस्किट, साबुन और अन्य एफएमसीजी उत्पाद हर घर की रोजमर्रा की जरूरत हैं। ऐसे में कीमत बढ़ने या पैकेट में मात्रा कम होने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ेगा। खासकर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह बढ़ता खर्च परेशानी का कारण बन सकता है। महंगाई से बचने के लिए कंपनियां भले ही इसे कारोबार की रणनीति बता रही हों, लेकिन उपभोक्ता के लिए इसका मतलब साफ है। समान कीमत में कम सामान या फिर उसी सामान के लिए अधिक कीमत। ऐसे में आने वाले महीनों में बाजार में उत्पादों की कीमत के साथ-साथ उनके पैकेट के वजन और मात्रा पर नजर रखना भी उपभोक्ताओं के लिए जरूरी होगा।

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