मुख्यपृष्ठटॉप समाचारमोदी सरकार करा रही है छोटे कारोबारियों का ‘आर्थिक एक्स-रे’

मोदी सरकार करा रही है छोटे कारोबारियों का ‘आर्थिक एक्स-रे’

-कमाई, खर्च और कारोबार का मांगा जा रहा हिसाब
-सवाल, सिर्फ आंकड़े जुटेंगे या भविष्य के राजस्व का भी खुलेगा रास्ता?

सामना संवाददाता / मुंबई
मोदी सरकार ने देश के छोटे और असंगठित कारोबारियों की आर्थिक गतिविधियों का विस्तृत हिसाब जुटाना शुरू किया है। केंद्र सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण (एएसयूएसई) २०२६ कराया जा रहा है। इसके तहत छोटे दुकानदारों, व्यापारियों, स्वरोजगार करने वालों, सेवा प्रदाताओं और दूसरी गैर-निगमित व्यावसायिक इकाइयों से उनके कारोबार से जुड़ी आर्थिक जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
सरकार का घोषित उद्देश्य देश के असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र की वास्तविक आर्थिक ताकत, रोजगार और उत्पादन का आकलन करना है। लेकिन सर्वे की प्रकृति को देखते हुए एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार इस विशाल असंगठित अर्थव्यवस्था की आर्थिक क्षमता को समझकर भविष्य में उसे अधिक औपचारिक और राजस्व व्यवस्था के दायरे में लाने की तैयारी भी कर रही है।
सर्वे के जरिए कारोबार का आकलन
सर्वे के जरिए कारोबार की प्रकृति, उसमें लगे कर्मचारियों, आय-व्यय, परिसंपत्तियों और दूसरी आर्थिक गतिविधियों का आकलन किया जाता है। इससे सरकार के सामने यह तस्वीर साफ हो सकती है कि छोटे कारोबारों में वास्तव में कितना पैसा घूम रहा है और अर्थव्यवस्था में उनका योगदान कितना है। हालांकि एएसयूएसई को सीधे कर सर्वे कहना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
भविष्य में बढ़ाया जा सकता है दायरा
सरकार इसे सांख्यिकीय और नीति-निर्माण संबंधी सर्वे बताती है और व्यक्तिगत सूचनाओं की गोपनीयता के भी प्रावधान हैं। इसके बावजूद समग्र आंकड़े भविष्य में सरकार को यह तय करने में मदद जरूर कर सकते हैं कि किन क्षेत्रों में पंजीकरण, औपचारिकीकरण और आर्थिक अनुपालन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
बनाई जा रही आर्थिक कुंडली
यानी आज सवाल केवल यह नहीं है कि सरकार छोटे कारोबारियों से क्या पूछ रही है। बड़ा सवाल यह है कि छोटे कारोबारियों की आर्थिक कुंडली तैयार होने के बाद सरकार उसका इस्तेमाल किस नीति के लिए करेगी?

 

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