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अंतावृत्ति रचना

गुणों से व्यक्ति होता सफल,
सफल होकर करे न दंभ।
दंभ उसे छूने न देगा शिखर,
शिखर पहुंचने के लिए चाहिए सबका साथ।
साथ मिलता, तब आता विश्वास,
विश्वास बना देता उसको खास।
खास बनकर करे जग की भलाई,
भलाई कर पाएगा सबके आशीर्वाद।
आशीर्वाद पा बोले वाणी संभल,
संभलकर बोलने से बढ़े प्रेम-व्यवहार।
व्यवहार तेरा बढ़ा देगा तुझमें नए गुण।
-बेला विरदी

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