मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
एआईएमआईएम के अध्यक्ष व सांसद असदुद्दीन ओवैसी बृहस्पतिवार को जानलेवा हमले के मामले में हापुड़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) शेष बहादुर की अदालत में सुनवाई के लिए पेश हुए। उनकी सुरक्षा को लेकर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल मुस्तैद रहा। इस दौरान बड़ी संख्या में हिंदू संगठन के लोग एकत्र रहे। पुलिस ने लोगों को कचहरी परिसर से बाहर किया। गवाही की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह न्यायालय से रवाना हो गए।
ओवैसी के अधिवक्ता ने बताया कि मुकदमे में यामीन माजिद और शौकत की गवाही पहले ही हो चुकी है। बृहस्पतिवार को ओवैसी की गवाही की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। अधिवक्ता के मुताबिक, मुकदमे में अभी करीब 40 से 45 गवाहों की गवाही होना बाकी है। अगली सुनवाई आठ सितंबर 2026 को होगी। निर्धारित तारीख पर शेष गवाहों की गवाही और अन्य न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ओवैसी के कचहरी पहुंचते ही एएसपी विनीत भटनागर, सीओ अनीता चौहान समेत कई थानों की पुलिस ने कचहरी में कड़ी घेराबंदी कर दी। छतों पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहे। इस दौरान हिंदू संगठनों के लोगों को पुलिस ने समझाकर शांत कराया। रस्सी से बैरिकेडिंग कर ओवैसी की सुरक्षा और अधिक पुख्ता की गई। पीएसी के जवान भी सुरक्षा में जुटे रहे। ओवैसी के पहुंचने पर एआईएमआईएम के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी कचहरी पहुंचे थे।
बता दें कि तीन फरवरी 2022 को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी पर पिलखुवा क्षेत्र के छिजारसी टोल प्लाजा पर जानलेवा हमला हुआ था। उस समय वह अपनी गाड़ी में सवार थे। मेरठ में चुनाव प्रचार से लौटते समय दिल्ली जा रहे ओवैसी के काफिले को टोल प्लाजा पर धीमा होना पड़ा था। इसी दौरान उनकी कार पर फायरिंग की गई थी। पुलिस के अनुसार, घटना में चार राउंड गोली चलने की बात सामने आई थी और ओवैसी की कार पर गोली के निशान भी मिले थे।
पुलिस ने मामले में सचिन शर्मा और शुभम को गिरफ्तार किया था। बाद में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जिसमें 60 गवाह बनाए गए थे। मामले की सुनवाई हापुड़ की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) की अदालत में चल रही है।
