शीतल अवस्थी
पूरे दिन तरोताजा और ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए रात में गहरी और सुकूनभरी नींद लेना बेहद जरूरी है। चिंता, मानसिक तनाव, सोने का स्थान, काम का दबाव और आस-पास की परिस्थितियां नींद में बाधा डाल सकती हैं। लंबे समय तक नींद पूरी न होने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे थकान, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और काम में एकाग्रता की कमी बनी रहती है। शरीर के लिए कम और जरूरत से ज्यादा, दोनों तरह की नींद नुकसानदेह हो सकती हैं।
कहते हैं कि अगर आपको सहजता से नींद आती है तो आप खुशकिस्मत हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में रात को ठीक से नींद न आने की समस्या आम हो गई है। शिफ्ट में काम करने वाले लोग अक्सर इस परेशानी से जूझते हैं। बार-बार शिफ्ट का समय बदलने से उनकी दिनचर्या और शरीर की प्राकृतिक घड़ी प्रभावित होती है। मानसिक तनाव और काम का दबाव भी अच्छी नींद न आने के प्रमुख कारण हैं।
रात में अच्छी नींद के लिए गद्दे और तकिए का आरामदायक होना जरूरी है। तकिया बहुत ऊंचा होने पर गर्दन जरूरत से ज्यादा आगे की ओर मुड़ सकती है, जिससे पीठ, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। गलत मुद्रा में सोने से सांस लेने में परेशानी और खर्राटों की समस्या भी बढ़ सकती है। यदि तेज खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने, हांफने या दिनभर अत्यधिक नींद आने जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यह ‘स्लीप एपनिया’ का संकेत हो सकता है।
योग, हल्का व्यायाम और ध्यान शरीर की थकान तथा तनाव कम करने में मदद करते हैं, जिससे अच्छी नींद आ सकती है। सोने से पहले गुनगुने पानी से स्नान करना या हाथ-पैर और मुंह धोना भी आरामदायक अनुभव देता है। नहाने के पानी में थोड़ी मात्रा में बाथ सॉल्ट या लैवेंडर तेल का उपयोग किया जा सकता है, बशर्ते उससे किसी प्रकार की एलर्जी न हो।
सोने से पहले हल्का गर्म या गुनगुना दूध पीना कुछ लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, दूध से एलर्जी या लैक्टोज असहिष्णुता होने पर इससे बचना चाहिए। रात में चाय, कॉफी, एनर्जी ड्रिंक, चॉकलेट और शराब का सेवन नींद में बाधा डाल सकता है। विशेष रूप से शाम के बाद चाय और कॉफी कम पीनी चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद कैफीन मस्तिष्क को सक्रिय रखता है। शराब से शुरुआत में उनींदापन महसूस हो सकता है, लेकिन इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है और रात में बार-बार नींद टूट सकती है।
शोर और तनाव भी नींद के बड़े दुश्मन हैं। सोने के कमरे को यथासंभव शांत, अंधेरा और आरामदायक रखना चाहिए। सोने से पहले मोबाइल फोन, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करें। इनसे निकलने वाली रोशनी शरीर में नींद से जुड़े मेलाटोनिन हार्मोन के प्राकृतिक निर्माण को प्रभावित कर सकती है।
दिनभर की थकान के बाद पैरों के तलवों की हल्की मालिश करने से शरीर को आराम मिलता है। तनाव के कारण कई बार मस्तिष्क में लगातार विचारों का मंथन चलता रहता है। ऐसी स्थिति में धीमी आवाज में मधुर संगीत सुनना, अपनी पसंद की किताब पढ़ना या कुछ समय ध्यान करना उपयोगी हो सकता है। इससे तनाव वाले विषय से ध्यान हटता है और नींद आने में आसानी होती है।
रात का भोजन हल्का रखें और सोने से दो-तीन घंटे पहले भोजन कर लें। बहुत अधिक मसालेदार, तला-भुना या भारी भोजन करने से अपच और एसिडिटी हो सकती है, जिससे नींद प्रभावित होती है। दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें, लेकिन सोने से ठीक पहले बहुत अधिक व्यायाम करने से बचें।
अच्छी नींद हमारे दिल, दिमाग और प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी है। गहरी नींद के दौरान शरीर अपनी मरम्मत और ऊर्जा की पुनःपूर्ति का काम करता है। नींद पूरी न होने पर आंखों के नीचे कालापन, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक नींद की कमी मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ा सकती है।
अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग सात से नौ घंटे की नींद पर्याप्त मानी जाती है। इसके लिए रोज सोने और जागने का समय तय करें। छुट्टी के दिन भी दिनचर्या में बहुत अधिक बदलाव न करें। नियमित समय-सारिणी अपनाने से शरीर को उस समय सोने की आदत पड़ जाती है। यदि तमाम उपायों के बावजूद कई सप्ताह तक नींद न आए या नींद की समस्या दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे तो स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक की सलाह लें।
