अजय भट्टाचार्य
पिछले हफ्ते भावनगर में जहरीली शराब से हुई त्रासदी के बाद पुलिस ने कई जगहों पर छापे मारे और अधिकारी उन लोगों का पता लगाने में जुट गए जिन्होंने शायद वह जहरीली शराब पी हो। अधिकारियों के बीच कलेक्टर और पुलिस की एक अनोखी संयुक्त अपील चर्चा का विषय रही, जिन लोगों ने वह शराब पी थी, उनसे मेडिकल जांच कराने का आग्रह किया गया। एक दुर्लभ कदम उठाते हुए, पुलिस ने जब्त की गई बोतलों का बैच नंबर भी जारी किया ताकि लोग पहचान सकें कि उन्होंने क्या पिया हो सकता है। वैसे प्रशासन जानता है कि राज्य में कितनी शराब पी जाती है, लेकिन वह हर किसी का पता नहीं लगा सकता। इसीलिए यह जोरदार अपील की गई। गुजरात में, कभी-कभी सबसे जरूरी संदेश वह होता है जो बोतल खुलने के बाद दिया जाता है।
विरोधी सबक लें
महामानव के विरोध में एकदम अंधे होने वालों को उनके काम के हर पहलू पर नजर डालनी चाहिए। अर्थव्यवस्था चौपट की है तो बेरोजगारी बढ़ाई भी है। शिक्षा पर सब्सिडी घटाई है तो पेट्रोल, डीजल, बिजली, एलपीजी के दाम बढ़ाए भी हैं। आरटीआई भले कमजोर किया है, मगर संघ को मजबूत भी किया है। रिजर्व बैंक को कंगाल किया है तो राष्ट्रीय सेठों को मालामाल भी किया है। एयरलाईंस, एलआईईसी, एयरपोर्ट, रेलवे बेच रहे हैं तो विधायक-सांसद खरीद भी रहे हैं। कोरोना संकट में कॉर्पोरेट को लाखों करोड़ दिए हैं तो जनता को भी पांच सौ-हजार रुपए दिए भी हैं और वो जो तुमको हर महीने मुफ्त में मन की बात सुनाते हैं। उसकी कीमत तुम क्या जानो रमेश बाबू!
मछली बाजार में रार
सूरत में ३.९० करोड़ रुपए की लागत से बनी नई मछली मंडी का नाम `श्री नरेंद्र मोदी होलसेल फिश मार्केट’ रखने के फैसले पर बवाल कट गया है। इससे व्यापारी, सूरत नगर निगम और स्थानीय भाजपा नेतृत्व सवालों के घेरे में आ गए हैं। नानपुरा लक्कड़कोट में बनी इस मछली मंडी में हाल ही में लगे बोर्ड का व्यापारियों के एक वर्ग ने विरोध किया। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री शाकाहारी हैं, उनका नाम मछली मंडी से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। फैसले के समर्थकों का तर्क है कि मत्स्य पालन क्षेत्र में मोदी ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से मछुआरों का समर्थन किया है। इसलिए, इस बाजार के साथ उनका नाम जोड़ने पर आपत्ति करने का कोई कारण नहीं है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं तथा व्यंग्यात्मक लेखन में महारत रखते हैं।)
