एड. कनई बिस्वास
धारा १८१, १८२ और १८३
भाग:६१
जाली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाने के उपकरण या सामग्री रखना, करेंसी नोट या बैंक नोट से मिलते-जुलते दस्तावेज बनाना या उपयोग करना तथा सरकारी स्टांप लगे कागज से लिखावट या स्टांप हटाकर सरकार को नुकसान पहुंचाना
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ केवल जाली मुद्रा या जाली सरकारी स्टांप बनानेवालों को ही दंडित नहीं करती, बल्कि ऐसे अपराधों की तैयारी करने, उनसे मिलते-जुलते दस्तावेज तैयार करने तथा सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को भी अपराध मानती है। कानून का उद्देश्य देश की आर्थिक व्यवस्था, सरकारी राजस्व और जनता के विश्वास की रक्षा करना है। धारा १८१, १८२ और १८३ इन्हीं प्रावधानों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘जाली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाने के उपकरण या सामग्री रखना’ (धारा १८१)
पुलिस ने एक गोदाम पर छापा मारा, जहां से नकली नोट छापने की मशीनें, विशेष स्याही, सुरक्षा धागे और अन्य उपकरण बरामद हुए। जांच में पता चला कि इनका उपयोग जाली करेंसी नोट तैयार करने के लिए किया जाना था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी के पास जाली सिक्के, सरकारी स्टांप, करेंसी नोट या बैंक नोट बनाने के उपकरण या सामग्री थी?
क्या उसका उद्देश्य उनका उपयोग जालसाजी के लिए करना था?
क्या उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की मंशा सिद्ध करते हैं?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी जालसाजी के उद्देश्य से ऐसे उपकरण या सामग्री अपने पास रखे हुए था तो उसके विरुद्ध धारा १८१ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८१ केवल जाली मुद्रा बनाने को ही अपराध नहीं मानती, बल्कि उसके लिए आवश्यक मशीन, उपकरण या सामग्री तैयार करना या अपने पास रखना भी दंडनीय अपराध है।
केस स्टडी- २: ‘करेंसी नोट या बैंक नोट से मिलते-जुलते दस्तावेज बनाना या उपयोग करना’ (धारा १८२)
एक व्यापारी ने प्रचार के लिए ऐसे पर्चे छपवाए, जिनका आकार, रंग और डिजाइन असली करेंसी नोट से काफी मिलता-जुलता था। कुछ लोगों ने उन्हें पहली नजर में असली नोट समझ लिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या दस्तावेज करेंसी नोट या बैंक नोट से भ्रामक रूप से मिलता-जुलता था?
क्या उसका उपयोग इस प्रकार किया गया जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो सकता था?
क्या आरोपी ने कानून में निर्धारित प्रतिबंधों का उल्लंघन किया?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने करेंसी नोट से मिलता-जुलता दस्तावेज बनाया या उसका उपयोग किया तो उसके विरुद्ध धारा १८२ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८२ का उद्देश्य ऐसे दस्तावेजों के निर्माण और उपयोग पर रोक लगाना है, जो असली करेंसी नोट या बैंक नोट जैसे दिखाई देकर लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।
केस स्टडी- ३: ‘सरकारी स्टांप लगे कागज से लिखावट या स्टाम्प हटाकर सरकार को नुकसान पहुंचाना’ (धारा १८३)
एक व्यक्ति ने इस्तेमाल किए गए स्टांप पेपर से सावधानीपूर्वक स्टांप हटाकर उसे दोबारा उपयोग करने की कोशिश की। जांच में पता चला कि उसका उद्देश्य सरकार को स्टांप शुल्क का नुकसान पहुंचाना था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या सरकारी स्टांप लगे कागज से स्टांप या लिखावट हटाई गई थी?
क्या ऐसा सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था?
क्या उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की मंशा सिद्ध करते हैं?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने सरकार को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से स्टांप या लिखावट हटाई, तो उसके विरुद्ध धारा १८३ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १८३ सरकारी स्टांप के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाई गई है। कोई भी व्यक्ति स्टांप हटाकर उसका दोबारा उपयोग नहीं कर सकता या ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता जिससे सरकार को राजस्व की हानि हो।
(अगले अंक में: धारा १८४, १८५ और १८६- ‘पहले से उपयोग किए जा चुके सरकारी स्टांप का उपयोग करना, सरकारी स्टांप के उपयोग का निशान मिटाना तथा काल्पनिक सरकारी स्टांपों पर प्रतिबंध’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
