मुख्यपृष्ठस्तंभसड़क धंसी, मोदी सरकार का ‘कनेक्शन’ नहीं!

सड़क धंसी, मोदी सरकार का ‘कनेक्शन’ नहीं!

-३,४८३ करोड़ के ठेके और बीजेपी सांसद के पारिवारिक रिश्ते ने खोला राज।

उमन गुप्ता
देश में एक्सप्रेसवे निर्माण को विकास की रफ्तार का प्रतीक बताया जा रहा है, लेकिन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने इसी विकास मॉडल पर सवालिया निशान लगा दिया है। करीब ४,२०० करोड़ की परियोजना में सड़क के कुछ हिस्सों में क्षति और दरारों की शिकायत सामने आने के बाद एनएचएआई ने पीएनसी इंफ्राटेक को शो कॉज नोटिस जारी किया और तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन कहानी सिर्फ सड़क की गुणवत्ता पर नहीं रुकती। पीएनसी इंफ्राटेक के चेयरमैन एवं एमडी प्रदीप कुमार जैन हैं और भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के साथ उनके पारिवारिक संबंध होने के दावे भी सार्वजनिक चर्चा में हैं। सवाल फिर भी अपनी जगह खड़ा है। अगर राजनीतिक या पारिवारिक संबंध का दावा गलत है तो स्पष्टता क्यों नहीं? और अगर संबंध है तो सरकारी ठेका प्रक्रिया में हितों के टकराव की जांच क्यों नहीं?
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीएनसी इंफ्राटेक को उत्तर प्रदेश के एनएच-९२७ से जुड़े दो नए हाईवे प्रोजेक्ट मिले हैं। इन दोनों की कुल लागत करीब ३,४८३ करोड़ है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस कंपनी के एक बड़े प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर एनएचएआई को नोटिस जारी करना पड़ा, उसी कंपनी को नए हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट देने से पहले पुराने प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किस तरह किया गया। क्या ठेका प्रक्रिया में गुणवत्ता का रिकॉर्ड निर्णायक था? क्या शिकायतों का असर नए ठेकों की पात्रता पर पड़ा? और क्या राजनीतिक रिश्तों की संभावित चर्चा को भी किसी स्वतंत्र एजेंसी ने जांचा? जब सरकारी पैसा और हजारों करोड़ के ठेके दांव पर हों, तब हितों के टकराव की जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है।
एनएचएआई और संबंधित मंत्रालय को सार्वजनिक करना चाहिए कि इन परियोजनाओं के लिए तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन में पीएनसी इंफ्राटेक की पिछली परियोजनाओं की गुणवत्ता को कितना महत्व दिया गया।
सरकार के सामने तीन सीधे सवाल
पहला ४,२०० करोड़ के एक्सप्रेसवे में गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जिम्मेदारी किसकी है? दूसरा पीएनसी इंप्रâाटेक को ३,४८३ करोड़ के नए प्रोजेक्ट देते समय क्या उसके पुराने काम की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा हुई? तीसरा भाजपा सांसद नवीन जैन और पीएनसी इंप्रâाटेक के शीर्ष प्रबंधन के बीच बताए जा रहे पारिवारिक संबंधों की वास्तविकता क्या है और क्या इसका ठेका प्रक्रिया पर कोई प्रभाव पड़ा? इन सवालों के जवाब दस्तावेजों में मिलने चाहिए। क्योंकि सरकारी सड़क जनता के पैसे से बनती है, किसी राजनीतिक परिवार की निजी जागीर से नहीं। सड़क पर पड़ी दरार शायद मरम्मत से भर जाएगी, लेकिन अगर सरकारी ठेकों और राजनीतिक कनेक्शन के बीच कोई दरार है, तो उसे सिर्फ जांच ही भर सकती है।

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