-दूसरों के दस्तावेज पर ३०० सिम एक्टिव, असली ग्राहक को थमा देते थे बंद कार्ड
-कंप्यूटर इंजीनियर समेत दो गिरफ्तार; १० बैंक खातों का भी सुराग, २५० से ज्यादा लोगों तक पहुंची जांच
पांढुर्णा। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले फर्जी मोबाइल नंबर आखिर अपराधियों तक पहुंचते वैâसे हैं? पांढुर्णा पुलिस के एक खुलासे ने इसकी पूरी परत खोलकर रख दी है। यहां महज १०० रुपये में दूसरे व्यक्ति के दस्तावेज पर एक्टिव सिम साइबर ठगों तक पहुंचाया जा रहा था और असली दस्तावेज धारक को इसकी भनक तक नहीं लगती थी।
पुलिस ने महाराष्ट्र के अमरावती जिले के सिंगोरी निवासी कंप्यूटर साइंस इंजीनियर पवन राऊत और उसके सहयोगी अथर्व बांसोड को गिरफ्तार किया है। जांच में करीब ३०० सक्रिय सिम कार्ड तथा लगभग १० बैंक खातों और एटीएम के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, पवन करीब दो साल से पांढुर्णा की बनसोड कॉलोनी में किराए के मकान से नेटवर्क चला रहा था। नेटवर्क का तरीका बेहद शातिर था। पुलिस के अनुसार, अथर्व लोगों के असली पहचान दस्तावेज लेकर उनके नाम पर सिम सक्रिय कराता। लेकिन असली ग्राहक को वही एक्टिव सिम देने के बजाय दूसरा बंद सिम थमा दिया जाता। ग्राहक यह समझता रहता कि तकनीकी कारण से उसका सिम नहीं चल रहा है, जबकि उसके दस्तावेज पर सक्रिय असली सिम आरोपी के पास पहुंच जाता था। प्रत्येक ऐसे सिम के बदले करीब १०० रुपये दिए जाते थे। यही सिम बाद में ऑनलाइन ठगी का सबसे सुरक्षित हथियार बन जाता था। पुलिस को आशंका है कि इनके जरिए ओटीपी हासिल करने, बैंकिंग लेन-देन और साइबर अपराध की दूसरी गतिविधियां संचालित की जाती थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया पर सस्ते प्लॉट, जमीन और महंगी कारों के फर्जी विज्ञापन डालकर लोगों को फंसाया जाता था। ग्राहक से एडवांस रकम मिलते ही नंबर बंद, सिम नष्ट और फिर नए सिम से नया शिकार तलाश लिया जाता था। अब तक २५० से ज्यादा लोगों के ठगी का शिकार होने के संकेत मिले हैं।
निर्दोष व्यक्ति के दरवाजे पर पुलिस
सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि एक ही नेटवर्क के पास सैकड़ों सिम दूसरों की पहचान पर सक्रिय वैâसे होते चले गए? सिम एक्टिवेशन में केवाईसी और पहचान सत्यापन के तमाम दावों के बावजूद यदि महज १०० रुपये में किसी नागरिक की डिजिटल पहचान साइबर ठगों के हाथ पहुंच सकती है, तो यह मामला सिर्फ दो आरोपियों की गिरफ्तारी का नहीं है। यह उस पूरी व्यवस्था की कमजोरी का खुलासा है जिसमें अपराधी किसी और का नाम, किसी और का दस्तावेज और किसी और की पहचान इस्तेमाल करके ठगी करता है और पुलिस पहुंचती है सबसे पहले उस निर्दोष व्यक्ति के दरवाजे पर, जिसके नाम पर सिम जारी हुआ था।
