-भाजपा सरकार के भीतर से ही उठे विरोध के सुर!
-राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर बोलीं-‘डीजे के शोर ने ली मेरे भाई की जान’
सामना संवाददाता / मुंबई
पुणे में गणेशोत्सव के दौरान डीजे बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा सरकार के भीतर तक पहुंच गया है। सार्वजनिक उत्सवों में कानफोड़ू डीजे और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने वाले विद्यानंद बापट के साथ मारपीट किए जाने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। बापट के नास्तिक होने को मुद्दा बनाकर उनकी भूमिका पर सवाल उठाने वालों को अब भाजपा सरकार की ही राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर के बयान से करारा जवाब मिला है। गणेशोत्सव हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार है, लेकिन त्योहार के नाम पर कानून, न्यायालय के निर्देश और नागरिकों के स्वास्थ्य की अनदेखी कैसे की जा सकती है? महाराष्ट्र की जनता के मन में यह प्रश्न उठ रहा है।
धाराशिव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में मंत्री मेघना बोर्डीकर ने डीजे संस्कृति का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि डीजे की तेज आवाज के कारण पिछले वर्ष गणेशोत्सव के दौरान उनके सगे चचेरे भाई की मौत हो गई थी। बोर्डीकर ने सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने डीजे को लेकर प्रतिबंध और ध्वनि प्रदूषण पर सीमाएं तय की हैं, तो फिर उनका पालन करने में लोगों को आपत्ति क्यों होती है? उन्होंने साफ कहा कि त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाएं और उत्सव मनाते समय भी कुछ मर्यादाएं तय करनी होंगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब गणेशोत्सव में डीजे को लेकर पुणे में तीखा विवाद चल रहा है।
‘हिंदू त्योहार का विरोध’ कहकर दबाने की कोशिश?
ध्वनि प्रदूषण का विरोध करने वाले विद्यानंद बापट के साथ कथित मारपीट के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या किसी नागरिक को अपने स्वास्थ्य और सार्वजनिक शांति के लिए आवाज उठाने का अधिकार भी नहीं है? बापट की नास्तिकता को उनके विरोध का आधार बनाना भी सवालों के घेरे में है।
