मुख्यपृष्ठनए समाचारगणेशोत्सव में दंगे कराने की साजिश?..राज ठाकरे ने व्यक्त किया संदेह

गणेशोत्सव में दंगे कराने की साजिश?..राज ठाकरे ने व्यक्त किया संदेह

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गणेशोत्सव के दौरान धार्मिक तनाव पैदा करने की आशंका जताते हुए हिंदू और मुस्लिमों से सतर्क रहने की अपील की। ठाणे में मनसे के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग त्योहारों के दौरान समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में सभी को सावधान रहना चाहिए।
राज ठाकरे ने कहा कि गणेशोत्सव का त्योहार शुरू हो चुका है। ऐसे समय में कुछ लोग जानबूझकर धार्मिक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने हिंदू-मुस्लिमों से अपील की कि वे किसी भी अफवाह या उकसावे में न आएं और शांति बनाए रखें।
धार्मिक तनाव पैदा करने वालों से सावधान रहें
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की महान हस्तियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज, भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की बराबरी में किसी अन्य को नहीं बैठाया जा सकता। प्रधानमंत्री का फोटो सरकारी कार्यालयों में लगाया जाए, लेकिन इन महान हस्तियों के साथ फोटो लगाने की जरूरत नहीं है।
त्योहारों में डीजे और डॉल्बी की जरूरत ही क्या?
गणेशोत्सव में डीजे और डॉल्बी बजाने को लेकर भी राज ठाकरे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानठलियां बैठा देने वाला डीजे बजाना महाराष्ट्र की संस्कृति नहीं है। हमारे त्योहार पारंपरिक तरीके से मनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान डीजे और डॉल्बी बजाने की जरूरत ही क्या है?
जीडीपी बढ़ने का दावा, फिर सोना क्यों न खरीदें?
राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीडीपी बढ़ने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार जीडीपी बढ़ने की बात करती है, लेकिन वास्तविक स्थिति क्या है, यह भी देखना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देश में कई विदेशी कंपनियों ने अपना कामकाज बंद किया है और हजारों उद्योगपति देश छोड़कर बाहर चले गए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि अगर देश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है, तो फिर लोगों को सोना खरीदने से क्यों रोका जाता है?
विदेशों के विकास मॉडल पर भी सवाल
राज ठाकरे ने ऑस्ट्रेलिया, हॉलैंड, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों के विकास मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन देशों में विकास हुआ है, लेकिन भारत को भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास का रास्ता तय करना चाहिए। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि केवल जीडीपी बढ़ने का दावा करने से आम आदमी की समस्याएं कैसे दूर होंगी?

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