मुख्यपृष्ठस्तंभ२५ साल बाद ९/११ के आतंकी हमले पर बड़ा खुलासा

२५ साल बाद ९/११ के आतंकी हमले पर बड़ा खुलासा

ई राज

आरोपी का सऊदी अरब से मिला था कनेक्शन; एफबीआई ने नहीं की कार्रवाई
सन १९९७ की एक ढलती शाम, सैन डिएगो का वह सुनसान मैदान गोलियों की तड़तड़ाहट और मजहबी नारों से गूंज रहा था। हाथ में एयर गन थामे, फौजी वर्दी पहने कुछ लोग पेंटबॉल के खेल में मशगूल थे। चेहरे पर छद्म मुस्कान, लेकिन आंखों में एक खौफनाक मंसूबा! कोई रंगीन जंग नहीं चल रही थी, बल्कि उस महा-तबाही का रिहर्सल हो रहा था, जिसने चार साल बाद पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया।
इस खौफनाक मंजर का केंद्र था ओमर अल-बायूमी, वही सऊदी नागरिक जो १९९४ में अंग्रेजी सीखने के बहाने अमेरिका में दाखिल हुआ था। लेकिन अंग्रेजी के पन्नों के पीछे वह रच रहा था मौत का ताना-बाना। उसके ठीक बगल में खड़ा था अलकायदा का खूंखार चेहरा, अनवर अल-अवलाकी। और उस टोली में सिर्फ आतंकी ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय का एक आला अफसर भी मौजूद था। वे आपस में गले मिल रहे थे, हंस रहे थे और फिर गोलियां दाग रहे थे। एफबीआई के मुताबिक, वह मासूम सा दिखने वाला पेंटबॉल का खेल वास्तव में जिहादी ट्रेनिंग का गुप्त पड़ाव था! फिर आया ११ सितंबर २००१ का वह काला दिन। चार विमान, दो जलते हुए ट्विन टॉवर्स, धुएं में तब्दील होता पेंटागन और २,९७६ निर्दोष लोगों की जलती हुई सांसें! तबाही के बाद जब हड़कंप मचा, तब बायूमी अमेरिका से रफूचक्कर होकर ब्रिटेन के बर्मिंघम पहुंच चुका था। २१ सितंबर २००१ को जब ब्रिटिश पुलिस ने उसके ठिकाने पर धावा बोला, तो होश उड़ गए।
हजारों पन्नों के दस्तावेज, ८० खौफनाक वीडियो टेप और सबसे चौकाने वाली चीज, एक गुप्त डायरी! उस डायरी के पन्ने पर हाथ से खिंचा हुआ था एक हवाई जहाज का स्केच। उसमें विमान की ऊंचाई, कोण और हवा में उड़ने की बारिकियां दर्ज थीं। वही विमान, जो आगे चलकर पेंटागन की दीवार में जा घुसा था!
लेकिन इस पूरी सनसनीखेज कहानी का सबसे कड़वा सच तो अब २५ साल बाद सामने आया है। बीबीसी के पास जो वीडियो टेप पहुंचा है, वह चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि एफबीआई के पास महा-तबाही से पहले ही सारे सबूत मौजूद थे। बायूमी की डायरी, वह पेंटबॉल का ट्रेनिंग वीडियो और पेंटागन के हमलावरों (नवाफ और खालिद) के साथ उसके सीधे रिश्ते,सब कुछ एक जगह सील पड़ा रहा।
अगर एफबीआई ने उस वक्त इस लालच और लापरवाही की परतें उधेड़ दी होतीं, तो शायद अमेरिका की आसमान चूमती इमारतें श्मशान न बनतीं। पर अफसोस, इतिहास ने उस कड़वे सच को २५ सालों तक फाइलों के अंधेरे में दफन रखा, और आज वही सच एक खौफनाक दास्तान बनकर दुनिया के सामने खड़ा है!
यह नया खुलासा एक बार फिर अमेरिकी एजेंसियों की तत्कालीन जांच प्रणाली और सऊदी अरब की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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