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मुंबई के कचरे ने खोला मनपा की पोल… कचरे के पहाड़ पर ३ करोड़ रुपए की ‘जांच’!.. जहर का पता लगाने में लगेंगे २ साल!

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में सालों से कचरे का पहाड़ खड़ा होता रहा, बदबू फैलती रही और प्रदूषण को लेकर शिकायतें उठती रहीं, लेकिन अब जाकर महानगरपालिका को चिंता हुई है कि आखिर कांजूरमार्ग के कचरे से कितनी मिथेन और जहरीली गैसें निकल रही हैं। इसके लिए करीब ३.०१ करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन की जिम्मेदारी सीएसआईआर-नीरी को दी गई है और इसे पूरा होने में दो साल लगेंगे। यानी पहले कचरा जमा करो, फिर बदबू और प्रदूषण फैलने दो और उसके बाद करोड़ों रुपए खर्च कर पता लगाओ कि जहर कितना फैला!
हाई कोर्ट के बाद जागी मनपा
कांजूरमार्ग की दुर्गंध और प्रदूषण को लेकर नागरिकों तथा पर्यावरण संगठन वनशक्ति की जनहित याचिका के बाद हाई कोर्ट ने भी मामले का संज्ञान लिया था। अब सवाल यह है कि अदालत के हस्तक्षेप से पहले नियमित वैज्ञानिक निगरानी क्यों नहीं हुई। नीरी छह, १२ और १८ महीने पर प्रगति रिपोर्ट देगा, जबकि अंतिम रिपोर्ट २४ महीने बाद आएगी।
मुंबई का ९० फीसदी कचरा एक ही जगह!
कांजूरमार्ग में करीब ११८ हेक्टेयर जमीन पर कचरा प्रबंधन किया जा रहा है। मुंबई में रोजाना पैदा होने वाले करीब ७,००० मीट्रिक टन कचरे में से लगभग ६,३०० टन यानी ९० फीसदी कचरा इसी परिसर में पहुंचता है। ऐसे में यहां होने वाला गैस उत्सर्जन और वायु प्रदूषण लाखों मुंबईकरों की सेहत से जुड़ा गंभीर सवाल है। नीरी ड्रोन, सेंसर और सैटेलाइट तकनीक से मिथेन के हॉटस्पॉट की मैपिंग करेगा। आग और तापीय जोखिम भी जांचे जाएंगे। इसके अलावा हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया, वीओसी, पीएम१०, पीएम२.५ समेत कई प्रदूषकों की निगरानी होगी।

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