राज्य लोक सेवा आयोग के पेपर लीक होने से पूरे महाराष्ट्र में जन-आक्रोश फूट पड़ा है। पुणे, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती में लोक सेवा आयोग के हजारों अभ्यर्थी और छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। `एमपीएससी’ के भ्रष्ट अध्यक्ष को हटाओ, पेपर लीक रोको, पेपर लीक की गहन और निष्पक्ष जांच करो, प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से आयोजित करो, इन मांगों के लिए विरोध-प्रदर्शन निकालकर महाराष्ट्र का युवा छात्र वर्ग सरकार के पसीने छुड़ा रहा है, जो बिल्कुल वाजिब है। अगर लोक सेवा आयोग के पेपर लाखों रुपयों में बेचे जा रहे हैं, तो प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी सेवा में करियर बनाने का सपना सीने से लगाए छात्रों के सपनों का यह चकनाचूर होना है। योग्य छात्रों को दरकिनार कर उनका हक छीनने वाले डकैत अगर सरकार और लोक सेवा आयोग के दफ्तरों में बैठे हैं, तो उन्हें खींचकर बाहर निकालना ही होगा। राज्य के मुख्यमंत्री ने अपने पसंदीदा लोगों को आयोग में बैठा दिया है और वही चांडाल चौकड़ी ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार में मौजूद `खोका संस्कृति’ क्या आयोग में भी आ गई है? लाखों रुपयों में पेपर बेचकर अगर सरकारी अधिकारी के पदों की नीलामी ही शुरू हो गई है, तो छात्र इसे कैसे बर्दाश्त करेंगे? महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर) पद भर्ती में पेपर लीक का जो मामला सामने आया है, वह शर्मनाक है। प्रतिस्पर्धी परीक्षा के पेपर बेचने वाले और खरीदने वाले कौन हैं, सरकार में किससे संबंधित हैं, यह अब छिपा नहीं रहा है। लेकिन छोटे-मोटे लोगों पर कार्रवाई करके पेपर लीक गैंग के आका, सूत्रधार और सरपरस्त
सरकार की कृपा से खुले ही
घूम रहे हैं, जिससे छात्रों में गुस्सा फैल गया है। प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की असीम मेहनत से तैयारी करने वाले छात्रों के मन में सरकार के खिलाफ लावा उबल रहा है और इसीलिए पूरे राज्य में छात्रों के आक्रोश मोर्चों से पेपर लीक के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं गूंज रही हैं। छात्रों के आक्रोश मोर्चों से महाराष्ट्र दहल उठा है और सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। छात्रों का आंदोलन गरमा गया है और सरकार अजगर की तरह सुस्त होकर ठंडी पड़ी है। युवाओं का गुस्सा देखकर सरकार बौखलाई हुई लगती है। वरना पूरे राज्य में गुस्साए छात्रों के पेपर लीक के खिलाफ आक्रोश मोर्चे निकल रहे हैं, तो मोर्चे का सामना करने का सौजन्य सरकार ने दिखाया होता। जब महाराष्ट्र में शिवशाही की सरकार थी, तब शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने मंत्रियों को सख्त ताकीद दी थी कि वे किसी भी मोर्चे का सामना करें। सरकार लोगों के लिए है, उनके सवाल हल करने के लिए है। इसलिए मोर्चे लेकर आने वाले लोगों की बात मंत्रियों को सुननी ही चाहिए, ऐसा नियम शिवसेनाप्रमुख ने बनाया था। लेकिन आजकल वातानुकूलित कमरों में बैठने वाले मंत्री सिर्फ ठेकेदारों से मिलते हैं और कमीशन की चर्चा करते हैं। जनता से और जनता के सवालों से उनका कोई लेना-देना नहीं रह गया है। पेपर लीक के सिलसिले में छात्रों का क्या कहना है, पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरने की नौबत छात्रों पर क्यों आई, छात्रों की मांगें क्या हैं, पेपर लीक की बार-बार होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए क्या करना चाहिए, यह सरकार नहीं तो कौन समझेगा? लेकिन इसे न समझने में इस सरकार की लाचारी है। जो सरकार खुद ऊपर से नीचे तक
`टूट-फूट’ से सनी हुई
है, वह पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर क्या ध्यान देगी? छात्रों के इस आंदोलन में कई रचनात्मक और व्यंग्यात्मक पोस्टर लहरा रहे हैं। `क्या आपको सिर्फ विधायक तोड़ने के लिए बैठाया है?’ ऐसा जहरीला सवाल करने वाले पोस्टर पुणे में प्रदर्शनकारी छात्रों ने लहराए। छात्रों के मन की यह भड़ास है। लोक सेवा आयोग में बैठे लोग पेपर फोड़ते हैं और सरकार में बैठे लोग पार्टी फोड़ते हैं। विधायक-सांसद, नगरसेवक फोड़ते हैं। दोनों का धंधा एक ही है। आयोग एक नंबरी है, तो सरकार दस नंबरी; ऐसा यह मामला है। पेपर लीक के मामले में दखल देने का नैतिक आधार ही इस सरकार के पास नहीं बचा है। इसीलिए प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलकर पेपर लीक के कारण अध्ययनशील और ईमानदार छात्रों पर होने वाले अन्याय को समझने का साहस यह सरकार नहीं दिखा पा रही है। पिछले दस सालों से महाराष्ट्र पर देवेंद्र फडणवीस का एकछत्र राज है। फिर भी छात्रों की जिंदगी तबाह करने वाले पेपर लीक जैसे मामले राज्य में घट रहे हैं। योग्य छात्रों को दरकिनार कर उम्मीदवारों का भविष्य फोड़ने और उनका करियर तबाह करने का पाप सरकार ने किया। `फूट’ और `तोड़-फोड़’ से जन्मे लोग जब सरकार में बैठे हैं, तो वहां फूट, लीक के सिवा दूसरा क्या होगा? पेपर लीक के खिलाफ भड़के गुस्से से राज्य के कई शहरों में छात्रों के आक्रोश मोर्चे टकरा रहे हैं। `फूटी’ सरकार के खिलाफ भरे गुस्से से युवा छात्रों का लावा सड़कों पर उमड़ रहा है। अगर इस आग का रूपांतरण दावानल में हो गया, तो यह `फूटी’ सरकार उसमें भस्म हो जाएगी। पेपर लीक के सभी डाकुओं को जेल में डालो। आग से मत खेलिए!
