-मेरठ की घटना ने फिर उठाया डरावना सवाल-छोटे बच्चों में अचानक क्यों रुक रहा है दिल?
जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं, स्कूल से घर लौटने की जल्दी में रहते हैं, उसी १३ साल की उम्र में मेरठ के कुणाल शर्मा की जिंदगी अचानक थम गई। मवाना थाना क्षेत्र के बसंत वैली पब्लिक स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला कुणाल सोमवार को छुट्टी के बाद बाथरूम गया, लेकिन वापस नहीं लौटा। करीब २:१५ बजे तलाश के दौरान वह वहां अचेत पड़ा मिला। डॉक्टर के पास ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। प्रारंभिक तौर पर मौत की वजह हार्ट अटैक अथवा हृदय गति रुकना बताई जा रही है, हालांकि मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण पूरी जांच के बिना निश्चित नहीं कहा जा सकता।
परिजनों के मुताबिक, कुणाल को पहले से दिल की कोई बीमारी नहीं थी। यही बात इस घटना को और ज्यादा चिंताजनक बनाती है। सवाल है कि देखने में स्वस्थ और महज १३ साल के बच्चे का दिल अचानक कैसे रुक सकता है? चिकित्सकीय दृष्टि से बच्चों में अचानक कार्डियक अरेस्ट दुर्लभ है, लेकिन असंभव नहीं। जन्मजात हृदय रोग, दिल की मांसपेशियों से जुड़ी छिपी बीमारी, हृदय की विद्युत प्रणाली में गड़बड़ी, आनुवंशिक समस्या या कुछ मामलों में संक्रमण के बाद हृदय में सूजन इसके कारण हो सकते हैं। कई बार ऐसी बीमारी के लक्षण पहले दिखाई ही नहीं देते। मेरठ की घटना को केवल ‘हार्ट अटैैक’ कहकर फाइल बंद कर देना पर्याप्त नहीं होगा। यह जानना जरूरी है कि वास्तविक कारण क्या था। पोस्टमार्टम और चिकित्सकीय जांच न होने पर अचानक मौत के पीछे छिपी वजह का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
कुणाल की मौत एक परिवार की त्रासदी है, लेकिन इसके साथ स्कूलों के सामने भी सवाल छोड़ गई है कि क्या स्कूल स्टाफ को सीपीआर की ट्रेनिंग है? क्या परिसर में एईडी जैसी जीवनरक्षक सुविधा होनी चाहिए? और क्या बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच में दिल की गंभीर छिपी बीमारियों की पहचान पर अधिक ध्यान देने का समय आ गया है?
