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टीएमयू में श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक

सामना संवाददाता / मुरादाबाद

तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू), मुरादाबाद में उत्तम शौच धर्म जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का चौथा धर्म है, जिसका अर्थ मन, वचन और शरीर से लोभ का त्याग कर आत्मा की पवित्रता को प्राप्त करने की भावना के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्वक मनाया गया। नौवें तीर्थंकर भगवान श्री पुष्पदंत जी का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य परी, मुकुल, मृदुल, आकृति, अनिमेष, मेरु और तरुण जैन को प्राप्त हुआ। सम्मेद शिखरजी की भाव-वंदना करते हुए निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य सहज, आदीश, अनिकेत, सौरभ, लक्ष्य, ऋषभ, चिन्मय और आदर्श जैन को प्राप्त हुआ।
भगवान का अभिषेक टीएमयू एल्युमिनाई संकल्प, डॉ. आदित्य जैन, फ़ैकल्टी, कंप्यूटर साइंस कॉलेज, डॉ. विपिन जैन, डीन मैनेजमेंट और डॉ. विनोद कुमार जैन, प्रिंसिपल, शिक्षा विभाग द्वारा स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक कर किया गया। इसके पश्चात रजत झारी से शांतिधारा करने का पुण्य पुष्प, तरुण, मृदुल, मुकुल, अंशु, नैतिक और अनिमेष जैन को प्राप्त हुआ। वहीं स्वर्ण झारी से शांतिधारा का सौभाग्य टीएमयू जिनालय परिवार के सार्थक, धार्मिक, सर्वज्ञ, प्रयास एवं अभिषेक जैन, टीएमयू एल्युमिनाई अमन और भावेश जैन को प्राप्त हुआ। इस पावन अवसर पर कामना, दृष्टि, स्वस्ति, ऋजुता, तनिष्का, रिया, राशि और विधि को अष्टकुमारी बनने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ। शांतिधारा के उपरांत श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती एवं भक्तिमय कार्यक्रम में भाग लिया। इशिका जैन ने तत्वार्थ सूत्र का शुद्ध एवं भावपूर्ण वाचन किया। इस अवसर पर टीएमयू कुलाधिपति परिवार के द्वारा विश्वविद्यालय के एल्युमिनाई विद्यार्थियों का स्वागत एवं सत्कार किया गया। इसके बाद पंडित ऋषभ शास्त्री जी के मुखारविंद से नवदेवता पूजा, पुष्पदंत पूजा, सोलहकारण पूजा एवं दस लक्षण पूजा विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई।
संध्या काल में मैनेजमेंट कॉलेज के डीन एवं फैकल्टी द्वारा जिनालय से श्रीजी की आरती को दिव्य घोष के साथ रिद्धि-सिद्धि भवन लाया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से भगवान की आरती की। अक्षिता और रिश्ता ने भक्तामर स्तोत्र का पाठ किया। दसलक्षण महापर्व के ‘उत्तम आर्जव’ दिवस पर पंडित ऋषभ शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा मन, वचन और कर्म में सरलता एवं एकरूपता रखना। अर्थात मन में कुछ और, वाणी में कुछ और तथा व्यवहार में कुछ और न हो। आर्जव का अर्थ है सरलता और निष्कपटता। व्यक्ति जैसा मन में सोचता है, वैसा ही वचन से कहे और उसी के अनुरूप आचरण करे। छल, कपट, दिखावा और मायाचारी से मुक्त होकर जीवन जीना ही उत्तम आर्जव धर्म है। उन्होंने समझाया कि आज मनुष्य कई बार कथनी और करनी में अंतर रखता है। वह स्वयं को धार्मिक और सरल दिखाता है, लेकिन व्यवहार में स्वार्थ, छल या दिखावे का सहारा लेता है। उत्तम आर्जव धर्म हमें इस दोहरे व्यवहार से मुक्त होकर ईमानदारी, सरलता, पारदर्शिता और निष्कपटता अपनाने की प्रेरणा देता है।
दूसरी ओर टीएमयू ऑडिटोरियम में टीएमआईएमटी कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा अहिच्छत्र में भगवान पार्श्वनाथ की माहिमा विषय पर एक मनमोहक एवं प्रेरणादायी प्रस्तुति दी गई। भगवान पार्श्वनाथ जब वट वृक्ष के नीचे ध्यान में लीन थे, तब उनके पूर्वजन्म के शत्रु कमठ ने भयंकर आंधी और वर्षा द्वारा उपसर्ग किया। तब पद्मावती देवी ने कमल का आसन बनाकर भगवान को जल से बचाया और अपने फणों का विशाल अहिच्छत्र बनाकर देव धरणेंद्र ने भी उनकी रक्षा की। संकट के बीच भी भगवान पार्श्वनाथ पूर्णतशांत और वीतराग रहे। इसी स्थान पर उन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और देवताओं ने उनका समवशरण बनाया। माना जाता है कि इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम अहिच्छत्र पड़ा । मुख्य संचालन डॉ.विभोर कुमार जैन के द्वारा किया गया । कुलपति प्रो. वी. के. जैन तथा प्रो. विपिन जैन, डीन मैनेजमेंट की उपस्थिति में टीएमआईएमटी कॉलेज के फाइनल ईयर विद्यार्थियों को फेयरवेल दी गई। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। सभागार में टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन एवं फर्स्ट लेडी वीना जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, ऋचा जैन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन, जाह्नवी जैन, नंदनी जैन सहित विश्वविद्यालय परिवार से प्रो. विपिन जैन, डॉ. विपिन जैन, प्रो. एस. के. जैन, मनोज जैन, डॉ. विनोद कुमार जैन, डॉ. रत्नेश जैन, डॉ. आदित्य जैन, डॉ. रवि जैन, डॉ. अक्षय जैन, डॉ.विभोर कुमार जैन, डॉ. नम्रता जैन, डॉ. आशीष सिंघई, अंकित जैन, वैभव जैन, डॉ. कल्पना जैन, डॉ. नीलिमा जैन, अहिंसा जैन, निकिता जैन, श्रीमती स्वाति जैन, आरजू जैन, डॉ. अर्चना जैन, सहित बड़ी संख्या में फैकल्टी सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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