अनिल मिश्र / पटना
बिहार प्रदेश के मोक्ष नगरी गया जी स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव की पहचान में गंभीर चूक का मामला प्रकाश में सामने आया है। दरअसल, परिजनों का आरोप है कि सड़क हादसे में मृत बिगन दास के शव की जगह परिजनों को दूसरा शव सौंप दिया गया और सही शव को लावारिस समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस बीच बताया जा रहा है कि जब तक परिजन कुछ समझ पाते और अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक लगती, तब तक शव को लावारिस समझ कर दाह संस्कार शुरू कर दिया गया। वहीं शव का लगभग अस्सी प्रतिशत दाह संस्कार भी किया जा चुका था। इस सनसनीखेज घटना के बाद अस्पताल परिसर और श्मशानघाट पर कल भारी हंगामा मच गया। पीड़ित परिजनों ने मगध मेडिकल थाने पहुंचकर अस्पताल कर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इस संबंध में मृतक बिगन दास के परिजन सुनील कुमार ने आपबीती बताते हुए कहा कि गुरारू थाना क्षेत्र के वर्मा गांव के पास शुक्रवार को विगन दास एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुरारू से रेफर कर दिया गया था, जिसके बाद उन्हें शुक्रवार को ही मगध मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार की रात करीब आठ बजे उनकी मौत हो गई। अस्पताल के कर्मचारियों ने परिजनों को बताया कि शव का पोस्टमार्टम शनिवार को दिन में किया जाएगा। शनिवार की सुबह शव को पोस्टमार्टम हाउस लाया गया, लेकिन आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सुपुर्द करने के बजाय किसी लावारिश शव को थमा दिया गया। आपको बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही रेलवे की तरफ से एक लावारिस शव को पोस्टमार्टम रूम में रखा गया था, पोस्टमार्टम होकर एक साथ अलग-अलग जगह पर तीन शव रखे गए थे, जब लावारिस शव को सरकारी स्तर पर दाह संस्कार कराया जाना था तभी अस्पताल के दो कर्मी लावारिस शव को ले जाने के बजाय सड़क हादसे में मारे गए बिगन दास को लावारिस समझकर उसे श्मशान घाट ले जाया गया और वहां अंतिम संस्कार कर दिया गया। अस्पताल कर्मी ने बताया कि मौके पर दो से तीन शव पोस्टमार्टम होकर रखा हुआ था।सभी सफेद कपड़े से लपेटा हुआ था, जिसमें पता नहीं चला, जो हमसे गलती हुई है। वहीं अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की प्राध्यापिका व प्राचार्य डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद शव की सही पहचान करके ही सौंपने का सख्त प्रावधान है और शव सौंपते समय एक जिम्मेदार कर्मचारी का मौजूद रहना अनिवार्य है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस पूरे मामले की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस बात का भी ध्यान रखी जाएगी कि अगले बार से इस तरह की लापरवाही की शिकायत अब कभी भी नहीं मिले।
