-नासा, जी-20 और संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक वैश्विक मंचों पर रख चुके हैं विचार…युवाओं को एआई से जोड़ना है लक्ष्य
डॉ. कमलकान्त उपमन्यु / मथुरा
क्रतिम बुद्धिमता यानी आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (एआई) आज शिक्षा , स्वास्थ्य , सुरक्षा और रोजगार सहित जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। इस तेज़ी से बदलती तकनीकी को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने और अभी हाल ही मैं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लालकिले की प्राचीर से किए गए अपने उद्बबोधन देश के एक करोड़ युवाओं को एआई के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा की मुहिम में मथुरा के अंतरराष्ट्रीय एआई विशेषज्ञ आयुष गर्ग विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सक्रिय भूमिका निभा रहे है।
मथुरा में जन्मे और मथुरा से ही प्रारंभीक शिक्षा प्राप्त, मथुरा के प्रतिष्ठित मथुरादास द्वारका दास परिवार के भूतेश्वर रोड स्थित सागर काम्प्लेक्स डी फ्रीजो इंडिया निवासी प्रभुदयाल कसेरे के प्रपौत्र एवं अनुज गर्ग के पुत्र आयुष गर्ग, एक अनुभवी तकनीकी विशेषज्ञ होने के साथ साथ ग्लोबल यूथ ए आई एडवाइजरी बॉडी (जो एक 50 देशों के ए आई विशेषज्ञों का समूह है) के अध्यक्ष और दिल्ली स्कूल ऑफ़ आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के संस्थापक भी है।
उनका उद्देश्य ए आई को केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों, शिक्षकों, नीति – निर्माताओं, युवाओं और आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी तथा ए आई शिक्षा को सहज बनाना है। वह नासा , जी-20, संयुक्त राष्ट्र , अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ ( आई टी यू ) , ब्रिक्स -2026 सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कृत्रिम बुद्धिमता से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत कर चुके है। आप भारतीय संसद से संबंधित मंचों , भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), दुबई इंटरनेशनल फाइनेंसियल सेंटर (डी आई एफ सी), टाइम्स ऑफ़ इंडिया और दैनिक जागरण आदि के साथ भी अंतर्राष्ट्रीय ए आई विशेषज्ञ के रूप में देश के युवाओं को ए आई का प्रशिक्षण दे रहे है।
रक्षा क्षेत्र में आई अनुसंधान के लिए आयुष गर्ग को अखिल भारतीय स्तर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा स्वर्ण पदक भी प्रदान किया गया है। उनकी भारतीय समुन्दरी सुरक्षा पर आधारित पुस्तक न्यूक्लियर वाटर्स डिटेक्शन ऑफ़ सबमरीन यूजिंग अक के प्रकाशन से उन्हें ए आई द्वारा शांति, सुरक्षा और संघर्ष के क्षेत्र में उनके किए गए कार्यों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। अफ़ग़ानिस्तान की छात्राओं को ए आई की शिक्षा उपलब्ध कराने की उनकी पहल को यूरोपीय देश जर्मनी स्थित हेग पीस पैलेस से भी सराहना प्राप्त हो चुकी है। इस पहल का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रह रही छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों से जोड़ना था। प्रतिष्ठित संस्थानों से अध्यन और प्रशिक्षण प्राप्त आयुष गर्ग ने भू- राजनीति, रणनीती, साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे विविध विषयों में अध्ययन एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वह सेंट स्टीफेंस कॉलेज दिल्ली, मद्रास यूनिवर्सिटी डिफेंस स्टडीज, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, हार्वर्ड, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे विश्व स्तरीय संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर अब देश विदेश के युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे है।
ए आई के सामाजिक प्रभाव पर विशेष ध्यान
आयुष गर्ग का शोध केवल तकनीकी विकास तक सीमित नहीं है। उन्होंने ए आई और प्रशासन, ए आई और क़ानून व्यवस्था, ए आई और स्वास्थ्य, ए आई और कृषि आदि के अलावा उनके नेतृत्व मैं ग्लोबल यूथ एडवाइजरी बॉडी के 50 देशों के युवा ए आई विशेषज्ञों के समूह ने ए आई के लिए कोड ऑफ़ कंडक्ट भी तैयार किया, जिसे सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क अमेरिका स्थित यूएनओ के मुख्यालय मैं आयोजित समिट फॉर फ्यूचर जिसमे भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी सहित लगभग 50 से भी अधिक राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया, के दौरान यूएनओ के अंडर सेक्रेटरी और टेक्निकल हेड अमनजीत गिल ने यह कोड ऑफ़ कंडक्ट पूरी दुनिया के आगे प्रस्तुत किया।
आयुष बताते हैं कि अब उनका ए आई विशेषज्ञ वैश्विक समूह ए आई के उपयोग के लिए संविधान (चार्टर) तैयार कर रहा है। जिसे आगामी 23 सितंबर को यूएनओ जारी करेगा। तत्पश्चात 24 सितंबर को चीन और अमेरिका में संभावित शिखर बैठक मैं इस चार्टर पर चर्चा होने की तैयारी है। आयुष का मानना है कि भारत सरकार की रक्षा एवं सैन्य क्षेत्र में ए आई , सेमीकंडक्टर नीति जैसे सतत विकास लक्ष्यों के मद्देनजर भारतीय युवाओं के सुनहरे भविष्य के लिए शिक्षा में एआई प्रशिक्षण को बाध्यकारी बनाने की जरूरत है। तभी भारत में ए आई का वास्तविक लाभ मिलेगा। जब विश्व की इस चौथी सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति को शीघ्र से शीघ्र भारतीय युवाओ और आमजन तक प्रशिक्षण के माध्यम से पहुंचाया जाय, साथ ही यह तकनीकी महानगरों और बड़े संस्थानों से निकलकर छोटे, मध्यम शहरों, विद्यालयों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिक तक पहुंचे। इसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण के साथ नैतिकता, पारदर्शिता, गोपनीयता और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की समझ विकसित करना भी आवश्यक है। पीएम नरेंद्र मोदी युवा शक्ति के ज़रिए विकसित भारत की जी बात कर रहे है, जो ए आई के बिना संभव नहीं है।
