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ईरान की अमेरिका को धमकी… शर्तें मानो या फाइनल जंग के लिए रहो तैयार

-एमएमएस

पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट और सख्त संदेश भेजा है। तेहरान ने कतर के माध्यम से वॉशिंगटन तक एक ७-सूत्रीय प्रस्ताव पहुंचाया है, जिसमें साफ कहा गया है कि अगर अमेरिका को युद्ध समाप्त करना है, तो बातचीत ईरान की शर्तों पर ही होगी। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजई ने चेतावनी दी है कि यदि ये शर्तें खारिज होती हैं, तो ईरान कूटनीति का दरवाजा बंद कर निर्णायक और भीषण सैन्य टकराव के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान की ३ प्रमुख शर्तें
हालांकि, ईरान ने अपनी सभी सात शर्तों का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया है, लेकिन रेजई ने अल जजीरा को दिए साक्षात्कार में ३ मुख्य मांगों को सामने रखा है:
सभी मोर्चों पर जारी सैन्य संघर्ष और युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरान के सभी वित्तीय फंड को अविलंब जारी किया जाए।
ईरान पर लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह हटाया जाए।
मध्यस्थता और सैन्य तैयारी साथ-साथ ईरान और अमेरिका के बीच इस अप्रत्यक्ष संवाद को बहाल कराने में कतर और पाकिस्तान महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। अगस्त में पिछला समझौता समाप्त होने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।
एक तरफ जहां ईरान कूटनीतिक रास्ता खुला रखने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसने अमेरिका को अपनी सैन्य ताकत का अहसास भी कराया है। रेजई के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों के समीप मल्टी-वॉरहेड एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। ईरान का रुख साफ है कि ट्रंप की धमकियों के आगे झुकने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
अमेरिका के सामने बड़ा धर्मसंकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कदम उठाने के संकेत दे चुके हैं। ऐसे में ईरान की यह ‘प्रस्ताव सह चेतावनी’ रणनीति ट्रंप प्रशासन के सामने एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा करती है, क्या वॉशिंगटन कूटनीति का रास्ता चुनकर इन शर्तों पर विचार करेगा या फिर मध्य पूर्व को एक अनियंत्रित और विनाशकारी युद्ध की आग में झोंकने का जोखिम उठाएगा। अब गेंद पूरी तरह से अमेरिका के पाले में है।

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