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करंट का ‘मौत-द्वार’ बना गणपति पंडाल!

 – आठ साल की बच्ची समेत दो की मौत, चार घायल
-अस्थायी वायिंरग और सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

लालबाग के कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के प्रवेश-द्वार के पास करंट फैलने से आठ वर्षीय रागिनी यादव और ३३ वर्षीय सुजाता की मौत हो गई। हादसे में चार लोग घायल हुए हैं। इनमें १२ वर्षीय रूही सिंह की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि तीन अन्य की स्थिति स्थिर है। यह दर्दनाक घटना प्रवेश-द्वार के पास बनाए गए अस्थायी पानी एवं शीतपेय स्टॉल में हुई। सूचना मिलते ही बिजली आपूर्ति बंद कर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया। प्रारंभिक जानकारी में शॉर्ट सर्किट और अस्थायी विद्युत व्यवस्था को संभावित कारण बताया गया है।
सबसे बड़ा सवाल है कि स्टॉल की वायरिंग किसने और किन मानकों के तहत लगाई थी? करंट पैâलते ही एमसीबी ने बिजली आपूर्ति क्यों नहीं रोकी? क्या उचित अर्थिंग की गई थी? मंडल, मनपा और बिजली निरीक्षण से जुड़ी व्यवस्था की जांच की थी या सुरक्षा प्रमाणपत्र केवल कागजों में जारी कर दिया गया?
कालाचौकी पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन दो मौतों के बाद केवल प्राथमिकी और मुआवजे से जवाबदेही पूरी नहीं होगी। प्रशासन को मुंबई के सभी प्रमुख गणपति पंडालों में अस्थायी वायरिंग, अर्थिंग, एमसीबी, अग्निशमन उपकरण और विद्युत भार का तत्काल विशेष ऑडिट कराना चाहिए। आस्था के उत्सव में श्रद्धालुओं की सुरक्षा पहली शर्त है। लापरवाही से बना एक स्टॉल यदि ‘मौत का द्वार’ बन जाए, तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है।

उल्हासनगर में २६ वर्षीय युवती की करंट लगने से मौत
शहर के उल्हासनगर-३ स्थित ओटी सेक्शन के गणेश गंगा अपार्टमेंट परिसर में शनिवार देर रात करीब १२ बजे २६ वर्षीय करिश्मा मधवानी की करंट लगने से दर्दनाक मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, करिश्मा सीसीटीवी वैâमरे के लोहे के पोल के संपर्क में आर्इं और पोल में विद्युत प्रवाह होने से उनकी जान चली गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद बंद पड़े सीसीटीवी वैâमरों और उनके पोलों की विद्युत सुरक्षा पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। नागरिकों का आरोप है कि रखरखाव और तकनीकी जांच के अभाव में सुरक्षा के लिए लगाए गए पोल ही जानलेवा खतरा बन रहे हैं।

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