मुख्यपृष्ठस्तंभगपशप कॉलम : योगी की दिल्ली में ‘नो एंट्री’ या ‘वेिंटग’?

गपशप कॉलम : योगी की दिल्ली में ‘नो एंट्री’ या ‘वेिंटग’?

-प्रधानमंत्री पद पर सवाल आया तो बोले-‘राष्ट्र प्रथम’… आखिर दिल्ली से इतना संकोच क्यों?

-राजन पारकर

राजनीति भी बड़ी विचित्र चीज है। यहां प्रश्न कुछ होता है और उत्तर कभी-कभी उससे भी ज्यादा रोचक! उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा गया कि वर्ष २०२७ के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी क्या भूमिका होगी? क्या वे भविष्य में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्वयं को देखते हैं?
प्रश्न सीधा था। उत्तर भी आया, लेकिन ऐसा कि दिल्ली की राजनीतिक गलियों में चर्चा का एक और दौर शुरू हो गया। योगी ने कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी की भावना से आए हैं। राष्ट्र प्रथम उनका पहला सिद्धांत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश की २५ करोड़ जनता की सेवा की जिम्मेदारी दी है और उनका पूरा ध्यान आर्थिक विकास, सामाजिक विकास तथा सुशासन पर है।
अर्थात प्रधानमंत्री पद की चर्चा सामने आई और उत्तर प्रदेश की २५ करोड़ जनता सामने आ गई! राजनीतिक भाषा में कहें तो, प्रश्न दिल्ली का, उत्तर लखनऊ का! योगी ने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी स्वीकार नहीं की, लेकिन यह भी नहीं कहा कि वे इस दौड़ से बाहर हैं। बस अपनी वर्तमान जिम्मेदारी की चर्चा की। अब यही तो राजनीति का मजा है! कोई नेता कह दे, ‘मुझे प्रधानमंत्री बनना है’, तो चर्चा वहीं खत्म। लेकिन अगर कहे, ‘मेरा पूरा ध्यान जनता की सेवा पर है’, तो चर्चा और शुरू हो जाती है!
‘लाभार्थी की कोई जाति नहीं होती!’
योगी ने जातीय समीकरण और पीडीए की राजनीति पर भी कहा कि चुनाव केवल जातीय गणित से तय नहीं होते। प्रतिनिधित्व, स्थानीय मुद्दे, सुशासन और उम्मीदवार भी मायने रखते हैं। उनका कहना था, ‘लाभार्थी की कोई जाति नहीं होती।’
वाह! चुनावी गणित में नया सूत्र! लेकिन सवाल यह है कि लाभार्थी की जाति भले न हो, क्या मतदाता की सामाजिक पहचान खत्म हो जाती है?
अभी लखनऊ, आगे दिल्ली?
फिलहाल, योगी ने प्रधानमंत्री पद पर न कोई दावा किया, न भविष्य की कोई घोषणा। इसलिए इसे ‘दिल्ली से दूरी’ या ‘दिल्ली की तैयारी’ कहना जल्दबाजी होगी।
लेकिन राजनीति की गपशप में टिकट बुक हो या न हो, प्रतीक्षालय जरूर सज जाता है!
और योगी ने फिलहाल अपना पत्ता जेब में ही रखा है। राजनीति में सबसे खतरनाक चीज तलवार नहीं, समय से पहले खुल गया राजनीतिक पत्ता होता है!

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