-एड. कनई बिस्वास
भाग:७२
- लोक सेवक द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करना, कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना तथा लोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना
- भारतीय न्याय संहिता, २०२३ यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी जांच, प्रशासनिक कार्यवाही और न्यायिक प्रक्रिया में संबंधित व्यक्ति सत्य बोले, आवश्यक सहयोग करे और कानून के अनुसार, अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे। यदि कोई व्यक्ति लोक सेवक द्वारा विधिपूर्वक पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार करता है, अपने बयान पर हस्ताक्षर करने से मना करता है या शपथ अथवा प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देता है, तो वह कानून के अनुसार, दंडनीय अपराध करता है। धारा २१४, २१५ और २१६ इन्हीं अपराधों से संबंधित हैं।
केस स्टडी – १: ‘लोक सेवक द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करना’ (धारा २१४)
एक जांच अधिकारी ने सड़क दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी को पूछताछ के लिए बुलाया। गवाह कानूनन उत्तर देने के लिए बाध्य था, फिर भी उसने बिना किसी वैध कारण के आवश्यक प्रश्नों का उत्तर देने से साफ इनकार कर दिया।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विधिक दायित्व होने के बावजूद लोक सेवक के प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार किया, तो उसके विरुद्ध धारा २१४ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २१४ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी जांच और वैधानिक कार्यवाही में आवश्यक जानकारी उपलब्ध हो। बिना वैध कारण उत्तर देने से इनकार करना दंडनीय है।
केस स्टडी – २: ‘कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना’ (धारा २१५)
एक जांच के दौरान गवाह का बयान विधिवत दर्ज किया गया। पूरा बयान पढ़कर सुनाने के बाद भी गवाह ने बिना किसी उचित कारण के उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिससे कार्यवाही में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हुई।
पैâसला– यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विधिक दायित्व होने के बावजूद कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया, तो उसके विरुद्ध धारा २१५ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २१५ का उद्देश्य सरकारी और न्यायिक अभिलेखों की विश्वसनीयता बनाए रखना है। यदि कोई व्यक्ति कानून के अनुसार, दर्ज किए गए अपने कथन पर बिना वैध कारण हस्ताक्षर करने से इनकार करता है, तो यह अपराध है।
केस स्टडी – ३: ‘शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना’ (धारा २१६)
एक व्यक्ति ने शपथ लेकर एक राजस्व अधिकारी के समक्ष भूमि विवाद से संबंधित बयान दिया। बाद में दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से यह साबित हो गया कि उसने जानबूझकर गलत तथ्य बताए थे।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने शपथ या प्रतिज्ञान पर जानबूझकर झूठा बयान दिया, तो उसके विरुद्ध धारा २१६ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २१६ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शपथ या प्रतिज्ञान के बाद दिए जाने वाले बयान सत्य हों। शपथ लेकर झूठ बोलना न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला गंभीर अपराध है।
भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि कानून के समक्ष सत्य बोलना और वैधानिक कार्यवाही में सहयोग करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। लोक सेवक के वैध प्रश्नों का उत्तर न देना, विधिपूर्वक दर्ज कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना तथा शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देना न्याय और प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करनेवाले अपराध हैं इसलिए इन कृत्यों के लिए स्पष्ट दंड का प्रावधान किया गया है।
(अगले अंक में: धारा २१७, २१८ और २१९ – लोक सेवक को झूठी सूचना देकर किसी अन्य व्यक्ति को हानि पहुंचाने का प्रयास, लोक सेवक द्वारा विधिपूर्वक संपत्ति लेने का विरोध तथा लोक सेवक के आदेश से होने वाली संपत्ति की बिक्री में बाधा डालने से संबंधित अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)
