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फ्लाईओवर की राह में जाम का ‘रोड़ा’!

 -कनेक्टिविटी सुधारने वाली परियोजना के निर्माण ने ही बढ़ाई मुंबईकरों की परेशानी
-दिसंबर २०२६ और मई २०२७ की डेडलाइन पर टिकी नजरें, समयसीमा खिसकने का डऱ

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी सुधारने के नाम पर तैयार हो रहा शहर का पहला मेट्रो-इंटीग्रेटेड फ्लाईओवर एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ५.०८ किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की तैयारी है, लेकिन मुंबईकरों के सामने बड़ा सवाल है कि आखिर इस परियोजना का पूरा लाभ कब मिलेगा और तब तक निर्माण की मार कौन सहेगा?
इनफिनिटी मॉल से पूनम नगर तक बनने वाले इस फ्लाईओवर का पहला चरण दिसंबर २०२६ और दूसरा चरण मई २०२७ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी मुंबईकरों को पूरी सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में काम की गति भी एक जैसी नहीं है। ऐसे में तय समयसीमा पर काम पूरा होगा या फिर डेडलाइन आगे खिसकेगी, इस पर नजर रहेगी।
कई एजेंसियां, जिम्मेदारी किसकी?
परियोजना में बीएमसी और एमएमआरडीए की अलग-अलग भूमिकाएं हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट में कई एजेंसियों के बीच तालमेल बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि काम में देरी होती है तो जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था क्या है? मुंबईकरों का अहम सवाल यह भी है कि लागत बढ़ने या समयसीमा खिसकने की स्थिति में जवाबदेह कौन होगा।
फ्लाईओवर बनने के बाद राहत मिलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन मुंबईकरों को सिर्फ उद्घाटन की तारीख नहीं, समय पर पूरा होने वाला काम, सुरक्षित निर्माण और जाम से वास्तविक राहत चाहिए। अब निगाह इस बात पर है कि २०२७ की डेडलाइन सिर्फ कागज पर रहती है या जमीन पर भी दिखाई देती है।
सड़क के साथ मेट्रो, लेकिन जाम का क्या
परियोजना का सबसे बड़ा दावा बेहतर कनेक्टिविटी का है, लेकिन निर्माण के दौरान मौजूदा सड़कों पर बढ़ने वाले दबाव, डायवर्जन और ट्रैफिक जाम को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अंधेरी, जोगेश्वरी और पूनम नगर जैसे पहले से ही भारी यातायात वाले इलाकों में निर्माण गतिविधिओं ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ा रखी है।

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