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डेवलपर्स की मनमानी पर म्हाडा का हथौड़ा!..बेघर किरायेदारों को मिलेगा घर और किराया

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई शहर की जर्जर और दशकों पुरानी उपकर इमारतों के पुनर्विकास को लटकाकर बैठे डेवलपर्स पर अब महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। म्हाडा से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने के बावजूद वर्षों से परियोजनाएं शुरू नहीं करने या काम बीच में रोक देने वाले डेवलपर्स की करीब १७ परियोजनाओं को अपने कब्जे में लेने का प्रस्ताव आवास विभाग को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद शहरी विकास विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी।
इन परियोजनाओं के अटकने का सबसे बड़ा खामियाजा उन किरायेदारों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्होंने अपने घर के पुनर्विकास के लिए डेवलपर्स पर भरोसा किया था। कई परिवार वर्षों से अपने घर से बाहर हैं, लेकिन न तो उन्हें नया मकान मिला और न ही नियमित किराया। ऐसे में अब म्हाडा ने रुकी परियोजनाओं को अपने हाथ में लेकर उन्हें दोबारा पटरी पर लाने की कवायद तेज कर दी है।
मुंबई शहर में १२ हजार से अधिक उपकर इमारतें मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी इमारतों की है, जो आठ से दस दशक पुरानी हैं और जर्जर हालत में पहुंच चुकी हैं। इन इमारतों के पुनर्विकास के लिए नियमों का पालन करने वाले डेवलपर्स को म्हाडा एनओसी जारी करता है। लेकिन एनओसी मिलने के बाद भी कई परियोजनाएं वर्षों तक कागजों में ही अटकी रहती हैं। कुछ जगह काम शुरू ही नहीं हुआ, तो कई जगह निर्माण शुरू होने के बाद अधूरा छोड़ दिया गया।
अब म्हाडा खुद संभालेगा मोर्चा
म्हाडा के अनुसार, कब्जे में ली जाने वाली परियोजनाओं को प्राधिकरण स्वयं पूरा करेगा। इसके लिए नया डेवलपर नियुक्त किया जाएगा। एनओसी लेते समय मूल डेवलपर ने जितने मकान और जिस किराए का प्रस्ताव दिया था, उसी के अनुरूप पात्र निवासियों को राहत देने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि वर्षों से घर की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों को उनका हक दिलाना है।
२० और जर्जर इमारतों पर भी कार्रवाई
अत्यंत खतरनाक उपकर इमारतों के मामले में म्हाडा ने २० इमारतों के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की है। संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत पहले भवन मालिक को पुनर्विकास का प्रस्ताव देने का अवसर दिया जाता है। निर्धारित अवधि में प्रस्ताव नहीं आने पर किरायेदारों को अवसर दिया जाता है।

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