-वर्सोवा-मढ पुल को हाई कोर्ट की हरी झंडी
-सरकार-बीएमसी के पर्यावरणीय दावों पर उठे सवाल
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में यातायात की समस्या दूर करने के नाम पर एक और बड़े पर्यावरणीय हस्तक्षेप का रास्ता साफ हो गया है। वर्सोवा और मढ द्वीप को जोड़ने वाले प्रस्तावित पुल के लिए १,२३७ मैंग्रोव्ज पेड़ों की कटाई को मुंबई हाई कोर्ट ने मंजूरी दे दी है। दो किलोमीटर लंबे और चार लेन वाले केबल-स्टे पुल को अदालत ने सार्वजनिक हित से जुड़ी परियोजना माना है, लेकिन इस पैâसले के साथ मुंबई के संवेदनशील मैंग्रोव्ज क्षेत्र पर विकास की कीमत का सवाल भी और गहरा गया है।
प्रस्तावित पुल से वर्सोवा-मढ के बीच सड़क दूरी २० किलोमीटर से अधिक घटकर करीब १.५ किलोमीटर होने और यात्रा समय एक घंटे से घटकर ८ से १० मिनट होने का दावा बीएमसी ने किया है। पुल को डीपी रोड और मुंबई कोस्टल रोड से जोड़कर एसवी रोड और लिंक रोड का यातायात कम करने की बात भी कही गई है, लेकिन सवाल यह है कि मुंबई की पहले से दबाव झेल रही तटीय पारिस्थितिकी के लिए इसकी कीमत कितनी होगी?
५६० से बढ़कर १,२३७ पेड़ों तक पहुंची कैंची
बीएमसी ने २०२१ में करीब २.८ हेक्टेयर मैंग्रोव्ज क्षेत्र प्रभावित करने वाला प्रस्ताव रखा था, जिसमें ५६० मैंग्रोव्ज पेड़ों की कटाई प्रस्तावित थी। बाद में स्थानीय मछुआरों की नौकाओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए पुल का संरेखण बदला गया और नए मार्ग में करीब २.५ हेक्टेयर मैंग्रोव्ज वन प्रभावित होने की बात सामने आई। इनमें करीब ०.५ हेक्टेयर क्षेत्र स्थायी रूप से प्रभावित होगा, जबकि लगभग २ हेक्टेयर को निर्माण के बाद बहाल करने का प्रस्ताव है।
‘काटो और फिर लगाओ’ का पर्यावरणीय मॉडल?
बीएमसी ने क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए महाराष्ट्र वन विभाग के मैंग्रोव्ज प्रकोष्ठ में १.४२ करोड़ रुपए जमा किए हैं। इसके तहत नौ हेक्टेयर क्षेत्र में ३९ हजार मैंग्रोव लगाने की योजना बताई गई है। लेकिन पर्यावरणीय कार्यकर्ताओं की आपत्ति यही है कि मौजूदा प्राकृतिक मैंग्रोव्ज को काटकर कहीं और पौधे लगाना क्या उसी पारिस्थितिकी तंत्र की वास्तविक भरपाई कर सकता है? इस मामले में बॉम्बे एनवायरनमेंटल एक्शन ग्रुप ने परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरियों और प्रभाव के आकलन पर सवाल उठाए थे।
२०१८ के हाई कोर्ट आदेश के चलते बीएमसी को मैंग्रोव्ज क्षेत्र और उसके ५० मीटर के दायरे में गैर-वन गतिविधियों के लिए अदालत की अनुमति लेनी पड़ी। अब अदालत ने परियोजना की सार्वजनिक उपयोगिता, पर्यावरणीय आकलन, वैधानिक मंजूरियों और प्रस्तावित बहाली उपायों को देखते हुए कटाई की अनुमति दी है।
