मुख्यपृष्ठटॉप समाचारकोस्टल रोड पर फिर रफ्तार बनी ‘मौत’!.. कैमरे सिर्फ चालान काटेंगे?

कोस्टल रोड पर फिर रफ्तार बनी ‘मौत’!.. कैमरे सिर्फ चालान काटेंगे?

-क्या सरकार का मकसद सिर्फ पैसा वसूली है?
-खतरनाक रफ्तार दिखी तो बीएमडब्ल्यू को अगले एग्जिट पर रोका क्यों नहीं?
-सुरक्षा दीवार तोड़कर ७५ फीट नीचे गिरी बीएमडब्ल्यू; तीन युवकों की मौत, एक की हालत गंभीर

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई महानगर के कोस्टल रोड पर रविवार तड़के तेज रफ्तार बीएमडब्ल्यू दुर्घटनाग्रस्त होकर पुल की सुरक्षा दीवार तोड़ते हुए करीब ७५ फीट नीचे जा गिरी। हादसे में कार सवार तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि चौथा युवक गंभीर रूप से घायल है।
हादसा उस समय हुआ, जब कार मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वाहन की रफ्तार अत्यधिक थी और लोटस जेट्टी के पास चालक ने नियंत्रण खो दिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सहायता दल मौके पर पहुंचे। चारों युवकों को नायर अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने तीन को मृत घोषित कर दिया। घायल युवक का गहन उपचार चल रहा है। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वाहन की तकनीकी स्थिति और दुर्घटना से पहले की गतिविधियों की जांच कर रही है। हादसे के समय चालक ने शराब का सेवन किया था या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। बेहतर और चौड़ी सड़क बेलगाम रफ्तार की अनुमति नहीं देती। कुछ क्षणों का रोमांच तीन परिवारों के लिए जीवनभर का मातम बन गया।
एग्जिट पर क्यों नहीं रोकी जाती तेज रफ्तार गाड़ी?
कोस्टल रोड पर लगे एएनपीआर कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने और गति उल्लंघन दर्ज करने में सक्षम हैं। सितंबर २०२५ से जनवरी २०२६ के बीच यहां करीब ६२ हजार चालान काटे गए। सीधी सड़क पर गति सीमा ८०, सुरंग में ६० और मोड़ पर ४० किलोमीटर प्रतिघंटा है। फिर भी रफ्तार का खेल जारी है।
बीएमडब्ल्यू मौत बनकर दौड़ती रही!
महंगी कार चलाने वालों के लिए दो-चार हजार रुपये का ई-चालान प्रभावी सजा नहीं, बल्कि ड्राइविंग का अतिरिक्त खर्च बन जाता है। चालान मोबाइल पर पहुंचने तक वाहन सड़क से बाहर निकल चुका होता है या किसी दुर्घटना का शिकार हो चुका होता है।
खतरनाक रफ्तार दर्ज होते ही वाहन का नंबर पुलिस नियंत्रण कक्ष, गश्ती दल और अगले एग्जिट तक पहुंचना चाहिए। सुरक्षित स्थान पर वाहन रुकवाकर चालक की जांच और अल्कोहल टेस्ट किया जाए। अत्यधिक रफ्तार अथवा रेसिंग मिलने पर चालान के साथ लाइसेंस निलंबन, वाहन जब्ती और खतरनाक ड्राइविंग का मुकदमा दर्ज हो। बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की अलग निगरानी सूची बने तथा रात और तड़के मोबाइल इंटरसेप्टर एवं पुलिस गश्त बढ़ाई जाए। तकनीक यदि सिर्फ चालान काटे और जान न बचा सके तो ऐसी ‘स्मार्ट निगरानी’ किस काम की?
रात होते ही ‘रेसिंग ट्रैैक’ क्यों बन जाते हैं कोस्टल रोड और सी लिंक?
कोस्टल रोड और बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर रात में बीएमडब्ल्यू, जगुआर, मर्सिडीज और लैम्बॉर्गिनी जैसी महंगी गाड़ियों को तेज रफ्तार में दौड़ते तथा एक-दूसरे से होड़ लगाते देखने की शिकायतें लगातार मिलती हैं। करोड़ों रुपये के कैमरे होने के बावजूद इन पर तत्काल शिकंजा क्यों नहीं कसता? स्पीड कैमरा जैसे ही किसी वाहन की खतरनाक रफ्तार दर्ज करे, उसकी नंबर प्लेट अगले एग्जिट और पुलिस दल तक पहुंचनी चाहिए। चालक को वहीं रोककर लाइसेंस और नशे की जांच की जाए। गंभीर अथवा बार-बार उल्लंघन पर वाहन जब्त और लाइसेंस निलंबित हो। पुलिस अगली दुर्घटना की प्रतीक्षा क्यों करे? वैâमरे केवल मौत का वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए नहीं, मौत रोकने के लिए लगाए गए हैं।
कैमरे से बचते हैं, फिर कानून से भी!
महंगी कारों में बेलगाम रफ्तार भरने वाले अमीरजादे दुर्घटनाओं में खुद भी मरते हैं और बेगुनाहों की जान भी लेते हैं। कई चर्चित मामलों में वे पहले स्पीड कैमरों और पुलिस की निगरानी से बच निकलते हैं, फिर धन और प्रभाव के सहारे कानूनी कार्रवाई को लंबा खींचते हुए जमानत पा लेते हैं। सवाल है—सड़कों पर रफ्तार और अदालत में रसूख का यह खेल आखिर कब तक चलता रहेगा?
क्या था पुणे का पोर्श कांड?
१९ मई २०२४ की रात पुणे के कल्याणी नगर में कथित रूप से शराब पीकर तेज रफ्तार पोर्श चला रहे १७ वर्षीय किशोर ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। हादसे में मध्य प्रदेश निवासी दो आईटी इंजीनियरों अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई। आरोपी एक नामी बिल्डर का बेटा था। किशोर न्याय बोर्ड ने हादसे के करीब १५ घंटे के भीतर उसे जमानत दे दी। शर्तों में यातायात दुर्घटनाओं पर ३०० शब्दों का निबंध लिखना भी शामिल था। इस फैसले से देशभर में भारी आक्रोश फैला।
जांच आगे बढ़ने पर किशोर के रक्त नमूने बदलकर शराब सेवन के प्रमाण मिटाने की कथित साजिश सामने आई। मामले में उसके माता-पिता, ससून अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य आरोपियों पर कार्रवाई हुई। किशोर को निगरानी गृह भेजा गया, लेकिन बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध बताते हुए रिहाई का आदेश दिया। किशोर पर वयस्क की तरह मुकदमा चलाने की पुलिस की मांग भी किशोर न्याय बोर्ड ने स्वीकार नहीं की। दो लोगों की मौत के बावजूद मुकदमे में लंबी देरी और आरोपियों को मिली कानूनी राहत ने यह सवाल खड़ा किया। क्या महंगी कार और प्रभावशाली परिवार के सामने कानून की रफ्तार धीमी पड़ जाती है?
डिवाइडर तोड़ ७५ फुट नीचे गिरी बीएमडब्ल्यू!
सुबह करीब ५:३० बजे मरीन ड्राइव से हाजी अली की ओर जा रही बीएमडब्ल्यू लोटस जेट्टी के पास डिवाइडर से टकराकर लगभग ७५ फुट नीचे जा गिरी। हादसे में तीन विद्यार्थियों/युवकों की मृत्यु हुई और एक २० वर्षीय युवक गंभीर अवस्था में नायर अस्पताल के आईसीयू में है। दो मृतकों की पहचान २१ वर्षीय शानय गज्जल और १७ वर्षीय धीर्य सेठ के रूप में बताई गई है; तीसरे मृतक की पहचान समाचार प्रकाशित होने तक पुष्ट नहीं हुई थी।

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