मुख्यपृष्ठस्तंभरौबीलो राजस्थान : उडतो तीर

रौबीलो राजस्थान : उडतो तीर

-बुलाकी शर्मा राजस्थान

‘राज‌ सूं रसूकात राखण में थे उस्ताद हो। हरेक सरकार में थां री पावली आठ आना में चालै। आपांरै स्हैर रै चेयरमैन साब री मांयली खबर क्या है भाईजी?’
कवि धाकड़जी नगर निगम रै चेयरमैन रै बारै में जाणनो चावै स्यात। केयो, ‘आपां तो बरसां पैला ई नगर निगम सूं साहित्यकार सम्मान लेय चुक्या, अबै आपांनै क्या।’
‘नगर निगम नीं आपांरै राजस्थान री साहित्यिक अकादमियां रै चेयरमैन रो पूछूं,’ धाकड़जी बोल्या, ‘ई सरकार नैं दो-ढाई बरस हुयग्या पण चेयरमैन कोनी थरप्या। लारली कार्य समितियां कानी सूं सर्वसम्मति सूं घोषित साहित्यिक अकादमियां रा पुरस्कारां अर सनमानां री राशि ई आ सरकार लेखकां नैं कोनी देय रैई है पण अचंभो वैâ लेखक मूंडै में मूंग घाल्यां बैठ्या है।’
‘थांरी नाराजगी वाजबी है कविराज। लेखकां नैं मिल’र सरकार सूं अकादमियां रा चेयरमैन मनोनीत करण री मांग करणी चाइजै।’
कवि धाकड़जी जोश में आयग्या। थेलै मांय सूं कागद निकाळ’र पेन सूं ओळ्यां मांडण लाग्या। म्हैं पूछ्यो, ‘ओ कांई कर रैया हो, कविराज?’
ओळ्यां मांडतां ई बां पडूत्तर दियो, ‘राज्य सरकार नै ज्ञापन देवण सारू मजमून त्यार कर रैयो हूं अकादमी चेयरमैनां नैं तुरता-फुरत मनोनीत करण रो, नीं जणै लेखक-कवि धरणो-प्रदर्शन करैला।’
धाकड़ियो म्हनैं ई फेंट में लेवणो चावै! अकादमी अध्यक्ष बणन सारू लारली सरकार में ई म्हैं घणा ई ताफड़ा तोड़्या, पार कोनी पड़ी। ई सरकार में गोटी फिट बैठती दीख रैई है, जणै‌ ओ घोचा घाळण लाग्यो है। गंभीर सुर में केयो, ‘थे लोग सरकार सूं जरूर मांग करो पण म्हनैं सामल ना करिया। सरकार विरोधी ज्ञापनां में म्हें कदैई दसखत कोनी करिया करूं।’
म्हनैं अचंभै सूं देखता बे बोल्या, ‘आपां सरकार रो विरोध कठै करां, आपणै हकां री बात करां हां, भाईजी।’
‘ज्ञापन देवणियो चैरो कोनी है म्हारो। भोत सीनियर लेखक हूं म्हैं। एमएलए साब, मंत्रीजी सूं म्हैं अरज कर चुक्यो हूं। सरकार कनै जन-हित रा दूजा घणा ई काम है, टैम मिल्यां अकादमी अध्यक्षां रा पद ई भर देसी कविराज।’
धाकड़जी ई सोचा-विचारी करण ढूक्या। अचाणचक बां ज्ञापन रै मजमून रो कागद लीर-लीर कर’र बोल्या, ‘सगळा लेखक मून धार राखी है जणै उडतो तीर लेवण री मूरखता म्हैं ई कोनी करूं। अकादमियां मरै के जीवै, सरकार जाणै के दूजा लेखक जाणै। समझदार लेखक बो जिको सरकार सूं बणा’र राखै। थां री सीख म्हनैं समझ‌ आयगी‌ है भाईजी।’
पण बे म्हारी तारीफ करी है के सबदां री झापड़ मारी है, म्हनैं समझ नीं आय रैयो है।

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