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नेपाल ने दिखाई आंख!

भारत-नेपाल सीमा पर पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) के धारचूला स्थित छारछुम में काली नदी पर बने नए ‘भारत-नेपाल मैत्री पुल’ का अभी औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ था कि इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पुल के नेपाली हिस्से की तरफ लगे स्वागत साइन बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव (‘छारछुम’ या ‘झारझुम’) का नाम लिखे जाने पर नेपाल ने कड़ा एतराज जताया है।
नेपाली नागरिकों और स्थानीय अधिकारियों ने इसे अपनी संप्रभुता पर सवाल मानते हुए तीखी आपत्ति दर्ज कराई। नेपाल पक्ष का कहना है कि उनकी ओर यह स्थान ‘महाकाली नगर पालिका ८, असिगड़ा (दार्चुला)’ है, इसलिए नेपाली सीमा में भारतीय गांव का नाम लिखा जाना अस्वीकार्य है। सुदूर पश्चिम प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस कदम को आधुनिक दौर में ‘१९वीं सदी की पिछड़ी सोच’ करार दिया। नेपाली प्रशासन ने इस मुद्दे की जानकारी अपने परराष्ट्र (विदेश) मंत्रालय और जिला प्रशासन को भेज दी है।
विवाद को तूल पकड़ता देख धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने मामले का अंतिम समाधान होने तक विवादित साइन बोर्ड को काली पन्नी से ढकवा दिया है।
यह ११० मीटर लंबा और १०.५० मीटर चौड़ा मोटरेबल पुल लगभग ३२.९८ करोड़ रुपए की लागत से भारत सरकार के अनुदान द्वारा निर्मित हुआ है। सितंबर २०२२ में शिलान्यास के बाद से क्षेत्र के लोगों को इसका बेसब्री से इंतजार है। इससे पहले पिथौरागढ़ में सीमा पार आवाजाही के लिए १० झूला पुल तो थे, लेकिन कोई सीधा मोटरेबल पुल न होने के कारण वाहनों को लगभग २०० किलोमीटर दूर बनबसा का चक्कर काटना पड़ता था। दोनों देशों की ओर संपर्क सड़कें, कस्टम और सुरक्षा शेड बनकर तैयार हैं, लेकिन उद्घाटन से ठीक पहले नेपाल के इस कड़े रुख और ‘आंख दिखाने’ के रवैये ने मैत्री पुल के भविष्य और इसके संचालन पर फिलहाल सवालिया निशान लगा दिया है।

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