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गणपति विसर्जन का शुभ समय कैसे तय करें?

शीतल अवस्थी

अनंत चतुर्दशी पर प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल में विदाई का विधान; पंचांग, स्थानीय व्यवस्था और श्रद्धा-तीनों का रखें ध्यान

गणेशोत्सव में भगवान श्रीगणेश की स्थापना जितनी श्रद्धा से की जाती है, उतनी ही विधि और सम्मान के साथ उन्हें विदाई देना भी आवश्यक माना गया है। भक्त अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात अथवा दस दिनों बाद गणपति प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। अधिकांश सार्वजनिक मंडल अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विसर्जन के लिए किसी एक निश्चित घड़ी का होना अनिवार्य नहीं है। गणपति बाप्पा की उत्तर पूजा करने के बाद दिन के सुविधाजनक शुभ काल में विसर्जन किया जा सकता है।

इन दिनों किया जाता है विसर्जन

* डेढ़ दिन के गणपति
* तीसरे दिन
* पांचवें दिन
* गौरी विसर्जन के साथ
* सातवें दिन
* अनंत चतुर्दशी के दिन

स्थापना के समय जितने दिनों का संकल्प लिया गया हो, सामान्यतः उसी के अनुसार विसर्जन करना चाहिए।

दिन में विसर्जन करना बेहतर

गणपति विसर्जन के लिए प्रातःकाल से सूर्यास्त तक का समय सुविधाजनक और श्रेष्ठ माना जाता है। दिन के प्रकाश में यात्रा तथा जलाशय के निकट प्रतिमा संभालना अधिक सुरक्षित रहता है। बड़े शहरों में भीड़ और प्रशासनिक व्यवस्था के कारण विसर्जन रात तक चलता है। ऐसी स्थिति में निर्धारित मार्ग, कृत्रिम तालाब और स्थानीय प्रशासन की समय-सारणी का पालन करना चाहिए।

राहुकाल से बचने की परंपरा

कुछ परिवार विसर्जन यात्रा आरंभ करते समय राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का विचार करते हैं। हालांकि अनेक विद्वानों के अनुसार गणेश विसर्जन स्वयं मांगलिक धार्मिक कार्य है और श्रद्धापूर्वक उत्तर पूजा के बाद इसे किया जा सकता है। परिवार की परंपरा में मुहूर्त देखने का नियम हो तो स्थानीय पंचांग अथवा विद्वान पुरोहित की सलाह लेना उचित होगा।

चौघड़िया के अनुसार समय

विसर्जन यात्रा के लिए सामान्यतः चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया को प्राथमिकता दी जाती है। स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार चौघड़िया का समय बदलता है। इसलिए पुराने वर्ष का मुहूर्त अगले वर्ष उपयोग नहीं करना चाहिए।

उत्तर पूजा सबसे महत्वपूर्ण

विसर्जन से पहले भगवान श्रीगणेश की उत्तर पूजा करें। उन्हें दूर्वा, पुष्प, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और मोदक अर्पित करें। आरती के बाद पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करें।

इसके बाद प्रतिमा को स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाएं। इसे स्थापना समाप्त होने और विदाई की अनुमति का प्रतीक माना जाता है। प्रतिमा को सुरक्षित चौकी पर रखकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं।

तिथि समाप्त होने से पहले निकलना आवश्यक?

यदि अनंत चतुर्दशी तिथि दिन में समाप्त हो रही हो तो परंपरागत रूप से तिथि के भीतर उत्तर पूजा और विसर्जन यात्रा आरंभ करना पर्याप्त माना जाता है। भीड़ या लंबी कतार के कारण वास्तविक विसर्जन बाद में हो सकता है। स्थानीय परंपरा को प्राथमिकता दी जा सकती है। मुहूर्त से अधिक महत्वपूर्ण है कि विसर्जन श्रद्धा, शांति, सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा के साथ किया जाए। बाप्पा की विदाई इस जयघोष के साथ करें—

गणपति बप्पा मोरया!
पुढच्या वर्षी लवकर या!

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