-होर्मुज से सिर्फ दो जहाज पास तेल की समुद्री नस लगभग सूनी
-एक दिन में १० से घटकर दो रह गई आवाजाही
एजेंसी / नई दिल्ली
ईरान युद्ध की आग ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल-नस को लगभग सूना कर दिया है। शिपिंग डेटा कंपनी केप्लर के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल दो कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि रविवार को यह संख्या १० थी। युद्ध से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन लगभग १२५ बड़े वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे। हालांकि एआईएस ट्रांसपोंडर बंद रखकर निकले जहाज इस गणना में शामिल नहीं हैं।
खतरा केवल रास्ता बंद होने तक सीमित नहीं है। रविवार को बाहर निकल रहे लाइबेरियाई ध्वज वाले एलपीजी टैंकर अल मरयाह पर अज्ञात प्रक्षेप्य लगा। इससे पहले कच्चा तेल ले जा रहे एलआर स्टेफनी पर हमले में दो नाविक मामूली रूप से घायल हुए थे। दोनों जहाज बिना खींचे आगे बढ़ने में सफल रहे। हमलावर और हमलों की जिम्मेदारी अभी पुष्ट नहीं हुई है। होर्मुज से दुनिया के करीब २० प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति गुजरती है। इसलिए जहाजों की यह ऐतिहासिक गिरावट भारत के तेल–गैस आयात, समुद्री बीमा, मालभाड़े, रुपए और महंगाई के लिए गंभीर चेतावनी है।
सऊदी की वैकल्पिक तेल-नस चालू
लेकिन रफ्तार अभी धीमी!
ड्रोन हमले के बाद बंद पड़ी सऊदी अरब की रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन दोबारा चालू हो गई है। तीन सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि पाइपलाइन फिलहाल कम क्षमता पर तेल पहुंचा रही है। लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से कच्चे तेल का निर्यात मंगलवार से बहाल होने की संभावना है। इस खबर के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल दो डॉलर प्रति बैरल से अधिक गिर गया। करीब १,२०० किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन सऊदी तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजारे बिना लाल सागर तक पहुंचाती है। इसलिए होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटने के बीच इसकी बहाली दुनिया के लिए बड़ी राहत है। हालांकि, संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है।
