सुरेश गोलानी / भायंदर
शहर में इस समय न तो सर्वोच्च न्यायालय का खौफ है, न हाई कोर्ट का सम्मान और न ही मुख्यमंत्री के आदेशों की कोई परवाह। मीरा-भायंदर महानगरपालिका और सत्ताधारी दल के गठजोड़ ने मिलकर पूरे शहर को अवैध होर्डिंग्स और बैनरबाजी के दलदल में धकेल दिया है। ‘चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो या खुद मेरा ही फोटो क्यों न लगा हो, अवैध बैनर और होर्डिंग्स पर बिना किसी संकोच के तुरंत कार्रवाई की जाए।’- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राज्यभर की मनपाओं को दिए गए इस बेहद सख्त निर्देश को मीरा-भायंदर में उन्हीं की पार्टी के नेताओं और पदाधिकारियों द्वारा खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। स्थानीय भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के जन्मदिन के मौके पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पूरे शहर की सूरत बिगाड़ दी गई है। न्यायालय के आदेशों को ताक पर रखकर शहर के प्रमुख चौराहों, ट्रैफिक सिग्नलों, बिजली के खंभों, फुटपाथों और पेड़ों पर कील ठोककर अवैध बैनर टांगे जा रहे हैं। महाराष्ट्र संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम,१९९५ और वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत अवैध बैनर लगाना एक दंडनीय अपराध है, जिसमें तीन महीने तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। लेकिन मनपा का फेरीवाला दस्ता, प्रभाग अधिकारी और अतिक्रमण विभाग के आला अधिकारी इन राजनीतिक बैनरों को मूक संरक्षण दे रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अब मांग तेज कर दी है कि न केवल अवैध बैनर लगाने वाले नेताओं पर, बल्कि लापरवाही बरतने वाले मनपा आयुक्त, उपायुक्त और संबंधित प्रभाग अधिकारियों पर भी न्यायालय की अवमानना का मामला दर्ज कर उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए।
अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अवैध बैनर लगाने वालों के साथ ही कार्रवाई में कथित लापरवाही बरतने वाले मनपा अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग उठी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आयुक्त, उपायुक्त और संबंधित प्रभाग अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना सहित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
