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पटना की पॉलिटिक्स : चुनाव लड़ा, वोट दिया… फिर एसआईआर में नाम गायब!

अरुण कुमार गुप्ता

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। १९९५ में पटना पश्चिम विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रहे रामजी प्रसाद राय का दावा है कि एसआईआर के बाद उनका नाम मतदाता सूची से गायब हो गया। राय के मुताबिक, चुनाव लड़ने के बाद भी वे लगातार मतदान करते रहे और २०२५ के विधानसभा चुनाव तक उनका नाम सूची में दर्ज था। नाम गायब मिलने पर उन्होंने बीएलओ और एसडीओ कार्यालय में शिकायत की। राय का कहना है कि उनके पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और पुराना मतदाता पहचानपत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। दिलचस्प यह है कि उनकी पत्नी का नाम उसी बूथ की मतदाता सूची में दर्ज है। सवाल यह है कि जब चुनाव लड़ चुके और लगातार मतदान करते रहे व्यक्ति का नाम एसआईआर में गायब हो सकता है, तो सामान्य मतदाता कितना सुरक्षित है? पात्र मतदाताओं के छूटे नाम वापस जोड़ने की प्रक्रिया कितनी आसान और प्रभावी है, अब चुनाव आयोग को इसका जवाब देना होगा।
बिहार में ‘पुलिस दीदी’ ही असुरक्षित!
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतारी गर्इं ‘पुलिस दीदी’ खुद सुरक्षित नहीं हैं! पटना में गश्त कर रही एक महिला पुलिसकर्मी के साथ कथित हाथापाई और थप्पड़ मारने के मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है। घटना ने महिला सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘पुलिस दीदी’ पहल का उद्देश्य महिलाओं और लड़कियों को सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का भरोसा देना तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता पहुंचाना है। लेकिन दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाली महिला पुलिसकर्मी के साथ ही सड़क पर बदसलूकी हो जाए तो व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपराध के मामलों में २४ घंटे के भीतर कार्रवाई और ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा कर चुके हैं। अब सवाल केवल आरोपी की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि गश्त करने वाली महिला पुलिसकर्मियों की अपनी सुरक्षा का भी है। जब ‘पुलिस दीदी’ ही असुरक्षित हों, तो आम महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा कौन दिलाएगा?
जेडीयू में ‘अनंत’ संकट!
बिहार विधान परिषद चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार और मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वे जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार सिंह के समर्थन में उतर आए हैं। एक अक्टूबर को अनुज सिंह के नामांकन और रोड शो में अनंत सिंह की मौजूदगी ने जेडीयू नेतृत्व की मुश्किल बढ़ा दी। अनंत सिंह का कहना है कि नीरज कुमार से उनका पुराना राजनीतिक विवाद है। उन्होंने नीरज पर अपने खिलाफ साजिश में शामिल रहने के आरोप भी लगाए हैं। मामला इतना बढ़ गया कि पार्टी ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को दोनों नेताओं के बीच विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी सौंप दी। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने इसकी पुष्टि की है। अब यह केवल दो नेताओं की निजी अदावत नहीं, बल्कि चुनाव के बीच पार्टी के अनुशासन और एकजुटता की परीक्षा बन गई है।

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