उमेश गुप्ता / वाराणसी
पितृ विसर्जन अमावस्या पर शनिवार को काशी के दशाश्वमेध घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही हजारों लोगों ने गंगा तट पर अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से विधि-विधान के साथ तर्पण, पिंडदान और पूजन किया। घाट पर दिनभर मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ अमावस्या पर तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को दान देकर पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। तीर्थ पुरोहित विशाल शास्त्री ने बताया कि शनिवार को पितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन हो रहा है। मान्यता है कि इस दिन गंगा तट पर विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि जो लोग किसी कारणवश घाट तक नहीं पहुंच सकते, वे घर पर ही अपने माता-पिता का पूजन कर तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर सकते हैं।
गंगा का जलस्तर बढ़ा होने और संकरी गलियों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए थे। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन सुचारु बनाए रखने के लिए दशाश्वमेध घाट सहित प्रमुख मार्गों पर पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। वहीं, पितृ अमावस्या पर पितरकुंडा और कपिलमुनि मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
