-नोबेल नहीं मिला तो अमेरिकी राष्ट्रपति की बौखलाहट आई सामने; नवी पिल्लै पर साधा निशाना, आठ युद्ध रुकवाने का किया दावा
नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खीझ सातवें आसमान पर पहुंच गई। दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार विशेषज्ञ नवी पिल्लै को यह सम्मान दिए जाने के बाद ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों का ढोल पीटना शुरू कर दिया। उनका दावा है कि उन्हें एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे! यानी दुनिया में शांति का तमगा भी अब ट्रंप अपनी मर्जी से बांटने लगे हैं!
आठ युद्ध रुकवाए, फिर भी खाली हाथ!
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए और कई बड़े अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाने में भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, जिन देशों की उन्होंने मदद की, वहां के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों ने नोबेल समिति को पत्र लिखकर उनके नाम की सिफारिश भी की। भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने का श्रेय लेते हुए उन्होंने इसे भी अपने पक्ष में बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, उनके इन दावों और संघर्षों में उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
नवी पिल्लै पर निशाना, चयन पर सवाल!
नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित रहने की अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्रंप ने नवी पिल्लै पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि न तो वे पिल्लै को जानते हैं और न ही जनता उनके बारे में कुछ जानती है। साथ ही उन्होंने पिल्लै को इजरायल का विरोधी बताकर पुरस्कार के चयन पर सवाल खड़े किए।
शांति के दावेदार, अपनी तारीफ के सहारे!
ईरान और रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए भी ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों का बखान किया। लेकिन सवाल यह है कि शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी जताने का उनका यह अंदाज दुनिया को कितना प्रभावित करेगा? शांति का नोबेल न मिलने पर आठ पुरस्कारों की मांग करने वाले ट्रंप की बयानबाजी ने एक बार फिर उनकी आत्मप्रशंसा को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। दुनिया में शांति कायम करने के दावों के बीच पुरस्कार न मिलने की यह तिलमिलाहट अब खुद एक राजनीतिक तमाशा बनती दिख रही है।
