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डीएम संग डांडिया नाइट में लुत्फ उठाते टॉप 10 अपराधी की चर्चा…अगले दिन पुलिस सत्यापन में घर पर नहीं मिले!

 -डांडिया नाइट्स की तस्वीर के बाद नैनी पुलिस के सत्यापन अभियान से उठे सवाल

-हिस्ट्रीशीटर और टॉप-10 सूची में नाम होने के दावों की आधिकारिक पुष्टि बाकी

राजेश सरकार / प्रयागराज

संगम नगरी में कानून-व्यवस्था और अपराधियों की निगरानी को लेकर एक ऐसा घटनाक्रम चर्चा में है, जिसके दो पहलू हैं। सोमवार को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में आयोजित डांडी नाइट्स कार्यक्रम के दौरान प्रदीप महरा जिलाधिकारी के करीब बैठा नजर आया। अगले ही दिन मंगलवार को नैनी पुलिस हिस्ट्रीशीटरों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के सत्यापन के लिए अरैल तथा पूरा फतेह मोहम्मद पहुंची, जहां प्रदीप महरा समेत कई लोग अपने घरों पर नहीं मिले। इन दोनों घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं, लेकिन इनके बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
एक तस्वीर, कई सवाल!
कार्यक्रम में जिलाधिकारी के करीब प्रदीप महरा की मौजूदगी सामने आने के बाद उसकी कथित आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा तेज हो गई। दावा किया जाता रहा है कि उसका नाम नैनी थाने के हिस्ट्रीशीटरों और टॉप-10 अपराधियों की सूची में शामिल रहा है। हालांकि, वर्तमान में इन सूचियों में उसका नाम दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सार्वजनिक आयोजनों में अतिथियों और आमंत्रित लोगों की पृष्ठभूमि की जांच की कोई व्यवस्था है या नहीं?
पुलिस पहुंची दरवाजे पर, कई लोग नदारद
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर इंस्पेक्टर अवनीश कुमार सिंह के नेतृत्व में नैनी पुलिस ने मंगलवार को अरैल और पूरा फतेह मोहम्मद क्षेत्र में पैदल गश्त कर हिस्ट्रीशीटरों तथा गोवध से जुड़े आपराधिक इतिहास वाले लोगों का सत्यापन किया। अभियान का उद्देश्य संबंधित व्यक्तियों के मौजूदा ठिकानों की जानकारी जुटाना, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना और शांति व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।
पुलिस के अनुसार, अरैल निवासी प्रदीप महरा, शुभम महरा, पिंटू महरा और अरविंद महरा अपने घरों पर नहीं मिले। वहीं, पूरा फतेह मोहम्मद निवासी मोहम्मद सिराज और महेश भारतीय भी घर पर मौजूद नहीं थे। इसी इलाके में रामबाबू पुत्र कल्लू घर पर मिला।
हालांकि, सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति का घर पर नहीं मिलना अपने आप में फरार होने का प्रमाण नहीं है। अहम सवाल यह है कि अनुपस्थित मिले लोगों के संबंध में पुलिस ने आगे क्या कार्रवाई की और उनका सत्यापन पूरा हुआ या नहीं?
पुराने मुकदमों और कार्रवाई के दावों की भी जांच जरूरी
प्रदीप महरा, जिनका नाम कुछ जगह प्रदीप माहरा भी लिखा जाता है, के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, जमीन पर कब्जे और धमकी जैसे मामलों में मुकदमे दर्ज होने के दावे किए जाते रहे हैं। उसे भूमाफिया बताए जाने तथा वर्ष 2020 में अरैल क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रयागराज विकास प्राधिकरण की ध्वस्तीकरण कार्रवाई का भी उल्लेख मिलता रहा है। इन दावों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए मुकदमों के आधिकारिक अभिलेख, वर्तमान आपराधिक स्थिति और संबंधित कार्रवाई के दस्तावेजों की पुष्टि जरूरी है।
जवाबदेही के सवाल अनुत्तरित
डांडिया नाइट्स में जिलाधिकारी के करीब नजर आने वाले व्यक्ति को लेकर उठी चर्चा और अगले दिन पुलिस के सत्यापन अभियान के बीच कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। क्या प्रदीप महरा का नाम वर्तमान में हिस्ट्रीशीटर या टॉप-10 सूची में दर्ज है? सत्यापन के दौरान घर पर नहीं मिलने के बाद पुलिस ने क्या कदम उठाए? क्या वर्ष 2020 की कथित ध्वस्तीकरण कार्रवाई से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं?
इन सवालों पर पुलिस और जिला प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में जिलाधिकारी के करीब बैठने से प्रशासनिक संरक्षण या मिलीभगत साबित नहीं होती, लेकिन यदि आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े दावे सही हैं, तो उनकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना भी उतना ही जरूरी है।
अब निगाह पुलिस और प्रशासन के जवाब पर है कि दावों की सच्चाई क्या है और सत्यापन अभियान का अगला कदम क्या होगा?

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