मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : खुली बगावत!

पटना की पॉलिटिक्स : खुली बगावत!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार में विधान परिषद चुनाव से पहaले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन जारी रखने का एलान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अनंत सिंह अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में अनंत सिंह का रुख जेडीयू के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। एक ओर पार्टी ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है, तो दूसरी ओर पार्टी के ही विधायक अनुज सिंह के समर्थन में खड़े हैं। अनंत सिंह का कहना है कि अनुज सिंह ने मुश्किल समय में उनका साथ दिया था, इसलिए अब वे उनका साथ निभाएंगे। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुराना राजनीतिक विवाद भी इस टकराव की पृष्ठभूमि में है। अनंत सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका विरोध व्यक्तिगत कारणों से भी जुड़ा है। ऐसे में यह लड़ाई केवल एक सीट के चुनाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पार्टी अनुशासन और व्यक्तिगत राजनीतिक संबंधों की बहस भी बन गई है।
बाहुबलियों की तिकड़ी!
बिहार की राजनीति में पटना स्नातक विधान परिषद सीट का चुनाव अब सिर्फ उम्मीदवारों की लड़ाई नहीं रह गया है। चुनाव प्रचार में प्रभावशाली स्थानीय नेताओं की सक्रियता ने मुकाबले को नया राजनीतिक रंग दे दिया है। मोकामा के जेडीयू विधायक अनंत सिंह, अखिलेश सिंह और अशोक महतो अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन में मैदान में हैं। इससे चुनावी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं। एक तरफ अनंत सिंह, दूसरी तरफ जेडीयू उम्मीदवार! रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह जन सुराज समर्थित उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनंत सिंह खुद जेडीयू के विधायक हैं, जबकि पटना स्नातक सीट से उनकी पार्टी ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में पार्टी के विधायक का दूसरे उम्मीदवार के लिए प्रचार करना जेडीयू के भीतर मतभेदों को सार्वजनिक करता है। रिपोर्टों के अनुसार, अखिलेश सिंह नीरज कुमार के समर्थन में वोट मांग रहे हैं, जबकि अशोक महतो राजद उम्मीदवार दिलीप कुमार के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। इस तरह तीनों नेताओं की सक्रियता अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन में दिखाई दे रही है। हालांकि, इनके प्रभाव का वास्तविक चुनावी परिणाम पर कितना असर पड़ेगा, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रशांत का प्रहार!
बिहार में कानून-व्यवस्था और चुनावी जवाबदेही को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए अपराध नियंत्रण, पुलिस की कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, किशोर ने आरा में एक सेवानिवृत्त सीमा-शुल्क अधिकारी पर गोलीबारी और नालंदा में पुलिसकर्मी की मौत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार को घेरा। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस-प्रशासन का ध्यान अपराध नियंत्रण से हटकर शराबबंदी और बालू कारोबार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार पर केंद्रित हो गया है। उनका दावा है कि जब अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोप उठते हैं, तो सरकार को जवाब देना चाहिए कि आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। विधान परिषद चुनाव के बीच प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से कहा कि यह चुनाव सरकार बनाने या गिराने का नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाने का अवसर है।

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