अनिल मिश्र / रांची
अपनी मां रूपी सोरेन की विदाई के बीच पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष की यादें… झारखंड प्रदेश के रामगढ़ जिले के नेमरा की मिट्टी, गांव की पगडंडियां और जल-जंगल से जुड़ा अतीत। मां स्वर्गीय रूपी सोरेन के श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में भावनाओं का ऐसा ही संगम देखने को मिला। उन्होंने अपने पिता, दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन के संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए मां के उस योगदान को सामने रखा, जो अक्सर इतिहास के पन्नों में पीछे छूट जाता है।झारखंड प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पोस्ट का संदेश साफ है— बाबा ने संघर्ष की राह चुनी, तो मां हर कदम पर उनकी ताकत बनकर खड़ी रहीं। यह सिर्फ एक पति-पत्नी के रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि त्याग, विश्वास और जीवनभर के साथ की वह गाथा है, जिसमें एक का संघर्ष दूसरे के संबल से मजबूत होता रहा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिखा, “गांव की इन्हीं पगडंडियों, इन्हीं खेतों और जल-जंगल के बीच बाबा ने संघर्ष की शुरुआत की थी। उस कठिन सफर में मां हर कदम पर उनकी हमसफ़र बनकर साथ चलीं।”इन पंक्तियों में नेमरा की मिट्टी से जुड़ी स्मृतियां ही नहीं, दिशोम गुरु के संघर्ष के शुरुआती दिनों की तस्वीर भी उभरती है। गांव की पगडंडियों और खेतों के बीच शुरू हुई इस यात्रा में स्वर्गीय रूपी सोरेन ने जीवनसंगिनी की भूमिका को हर कठिन दौर में निभाया। जब बाबा ने संघर्ष का रास्ता चुना, तब मां उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हेमंत सोरेन ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, “बाबा ने जब-जब संघर्ष की राह चुनी, मां ने हर मुश्किल में उनका हाथ थामे रखा।”उन्होंने मां रुपी सोरेन के योगदान को शब्द देते हुए लिखा कि बाबा के संघर्ष में मां सिर्फ उनकी साथी नहीं थीं, बल्कि उनकी ताकत, उनका संबल और हर कठिन मोड़ पर उनकी सबसे बड़ी हिम्मत थीं।यही इस पोस्ट का सबसे भावुक पहलू है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने उस साथ को रेखांकित किया, जिसने कठिन परिस्थितियों में उनका हौसला बनाए रखने में भूमिका निभाई। मां रूपी सोरेन का योगदान किसी शोर या प्रदर्शन में नहीं, बल्कि साथ निभाने, विश्वास बनाए रखने और मुश्किलों के बीच मजबूती से खड़े रहने में दिखाई देता है।मां के श्राद्ध कार्यक्रम के दौरान साझा की गई यह पोस्ट निजी स्मृतियों को सार्वजनिक शब्द देती है। एक ओर मां के बिछड़ने का भावुक अवसर है, तो दूसरी ओर पिता के संघर्ष में उनके योगदान को याद करने का भाव। हेमंत सोरेन ने नेमरा की पगडंडियों, खेतों और जल-जंगल का जिक्र कर उन जड़ों को भी याद किया, जिनसे दिशोम गुरु के संघर्ष की शुरुआत जुड़ी रही।बाबा के संघर्ष की कहानी में मां केवल साथ चलने वाली हमसफर नहीं थीं, बल्कि वह संबल थीं, जिसने कठिन राह पर उनका साथ निभाया। मुख्यमंत्री की यह पोस्ट इसी रिश्ते के त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास को सामने लाती है। नेमरा की मिट्टी से निकली इन भावनाओं में एक परिवार की स्मृतियां भी हैं और उस जीवनसाथी के योगदान की स्वीकारोक्ति भी, जो संघर्ष के हर मोड़ पर साथ खड़ी रही।इस पोस्ट में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जहां शिबू सोरेन और उनकी धर्मपत्नी रुपी सोरेन के पत्नी धर्म के साथ -साथ राजनीति के उखड़ -खाबड़ एवं खट्टे मीठे जीवन यात्रा के हर पहलुओं को रेखांकित करता है।
