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शबरी की भक्ति से भावविभोर हुआ मानस रामलीला मंच…गूंजे श्रीराम के जयकारे

 -प्रभु राम के दिव्य दर्शन, हनुमान मिलन, सुग्रीव मैत्री और बालि वध के मंचन ने भक्तिरस से सराबोर किया वातावरण

राजेश सरकार / प्रयागराज

प्रभु राम की असीम कृपा, भक्त के प्रति वात्सल्य और धर्म की विजय का अनुपम दृश्य रविवार को मानस रामलीला के मंच पर साकार हुआ। शबरी की अनन्य भक्ति, पवनपुत्र हनुमान का प्रभु राम से दिव्य मिलन, राम-सुग्रीव मैत्री और बालि वध के भावपूर्ण मंचन ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में गोते लगाने का अवसर दिया। रामचरितमानस की चौपाइयों और प्रभु श्रीराम के जयघोष के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
माता सीता की खोज में वन-वन विचरण करते हुए करुणानिधान भगवान श्रीराम और अनुज लक्ष्मण माता शबरी के आश्रम पहुंचे। वर्षों से प्रभु के आगमन की बाट जोह रहीं माता शबरी का रोम-रोम आनंदित हो उठा। अपने आराध्य को सामने पाकर उनकी आंखें प्रेमाश्रुओं से भर गईं। उन्होंने अत्यंत श्रद्धा और प्रेम से प्रभु राम को बेर अर्पित कर उनका सत्कार किया। भक्तवत्सल भगवान ने भी अपनी भक्त के निष्कपट प्रेम को सहर्ष स्वीकार किया और उन्हें नवधा भक्ति का अमूल्य उपदेश प्रदान किया।
इस दिव्य प्रसंग ने संदेश दिया कि प्रभु राम जाति, कुल और वैभव नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल हृदय और अनन्य प्रेम को महत्व देते हैं। माता शबरी की भक्ति ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची श्रद्धा और अटूट विश्वास से स्वयं परमात्मा भक्त के द्वार तक चले आते हैं। रामचरितमानस की चौपाई ‘ताहि देइ गति राम उदारा, शबरी के आश्रम पगु धारा’ के भाव ने श्रद्धालुओं के मन में प्रभु के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना को और प्रगाढ़ किया।
माता शबरी को दर्शन एवं नवधा भक्ति का उपदेश देकर प्रभु ऋष्यमूक पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं। यहां पवन पुत्र हनुमान और भगवान राम का दिव्य मिलन होता है। अपने आराध्य को पहचान कर हनुमान की भक्ति, विनम्रता और समर्पण का भाव साकार हो उठता है। हनुमान के माध्यम से प्रभु राम और सुग्रीव की मैत्री होती है। मित्र के दुख को अपना दुख मानकर प्रभु राम सुग्रीव को न्याय दिलाने का संकल्प लेते हैं।
इसके पश्चात बालि वध का प्रभावशाली मंचन हुआ। भगवान राम ने अधर्म का अंत कर सुग्रीव को उसका अधिकार दिलाया। यह प्रसंग धर्म की रक्षा, वचन पालन और सच्ची मित्रता की महिमा को दर्शाता है। रामचरितमानस की चौपाई ‘सुनु सुग्रीव मारिहउँ बालिहि एकहि बान’ के भावपूर्ण चित्रण ने प्रसंग को विशेष प्रभावशाली बना दिया। बालि की भूमिका त्रिलोक नारायण चतुर्वेदी तथा सुग्रीव की भूमिका सूर्य नारायण मिश्रा ने निभाई।
बालि वध के उपरांत सुग्रीव ने माता सीता की खोज के लिए वानर दलों को चारों दिशाओं में प्रस्थान करने का आदेश दिया। रामकाज को सर्वोपरि मानते हुए वानर सेना के अभियान का मंचन भक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश दे गया। इस प्रसंग में प्रभु राम के कार्य के प्रति निष्ठा और भक्तों के सेवाभाव की सुंदर झलक देखने को मिली।
मानस रामलीला मंचन के दौरान पूर्व महापौर प्रत्याशी विजय मिश्रा, भाजपा नेता रणजीत सिंह और कांग्रेस नेता अनूप त्रिपाठी का मानस रामलीला समिति के अध्यक्ष धीरेन्द्र यादव ‘धीरू’ एवं महामंत्री नयन कुमार कुशवाहा ने अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम में शिवशंकर दीक्षित, राकेश श्रीवास्तव, राजकुमार कुशवाहा, रवि मिश्रा, विनोद जैकब, रवि यादव, अर्पित तिवारी, राजेश थापा और पवन पांडेय सहित अन्य उपस्थित रहे। मानस रामलीला का यह मंचन प्रभु श्रीराम की करुणा, माता शबरी की अनन्य भक्ति, हनुमानजी की सेवाभावना और धर्म की विजय का संदेश देता रहा। प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरणा मिली कि जीवन में प्रेम, सेवा, सत्य, मित्रता और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास ही सच्चे धर्म के आधार हैं।

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