मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : बाबू, समझो इशारे!..ईरान पर भयंकर हमला तय?

मुस्लिम वर्ल्ड : बाबू, समझो इशारे!..ईरान पर भयंकर हमला तय?

-सूफी खान
एक बार फिर सुगबुगाहट बढ़ रही है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा हमला करने जा रहा है। यह हमला परमाणु हमला तो नहीं होगा, लेकिन उससे कम भी नहीं होगा। अमेरिका ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का इस्तेमाल कर सकता है और ईरान भी इसका जवाब देने की तैयारी कर रहा है।
तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि अब आर-पार की जंग की आशंका बढ़ रही है। इसे लेकर जो संकेत मिल रहे हैं, उनके मुताबिक, इजरायल के भीतर मोबाइल शेल्टर लगाए जा रहे हैं। तेल अवीव में कई जगह मोबाइल शेल्टर लगाए गए हैं। हमले की स्थिति में इन शेल्टरों को कहीं भी रखा जा सकता है और लोग इनके भीतर सुरक्षित रह सकते हैं। मोबाइल शेल्टर इसलिए भी लगाए जाते हैं कि अगर कभी ईरान का हमला हो और सायरन बजने लगें, तो बाजारों और सड़कों पर मौजूद लोग दौड़कर इन शेल्टरों में प्रवेश कर सकें। उधर, ईरान भी जबरदस्त तैयारी कर रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के हवाले से खबर है कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के इलाके में यूएई के काफी करीब कुछ बड़ी मिसाइलें दागी हैं। हमला यूएई पर नहीं हुआ, बल्कि उसके करीब ईरानी इलाके में ही मिसाइलें और ड्रोन गिराए गए हैं। यह वह इलाका है, जहां से समुद्र के उस पार यूएई के बंदरगाह कुछ ही दूरी पर हैं। हालांकि, इन खबरों की पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन ईरान के कदम बता रहे हैं कि वहां भी ‘सरफरोशी की तमन्ना’ का जज्बा जाग उठा है। भीषण जंग का खतरा इसलिए भी बढ़ रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने १६ अक्टूबर को एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में संकेत दिए थे कि वह ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ गिराने की तैयारी में हैं।
ट्रंप ने कहा, ‘‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ परमाणु बम नहीं है, लेकिन यह बहुत बड़ा बम है।’ विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ अमेरिका का विकसित किया गया एक विशाल गैर-परमाणु बम है। इसका वजन लगभग ९.८ टन (करीब २१,६०० पाउंड) होता है और इसमें लगभग ८.५ टन विस्फोटक होता है। यह करीब ११ टन टीएनटी के बराबर विस्फोटक प्रभाव पैदा करता है। यह जमीन से टकराने से ठीक पहले हवा में फटता है। हवा में होने वाले इस जोरदार धमाके से करीब १.५ किलोमीटर के दायरे में भयंकर शॉकवेव और दबाव पैदा हो सकता है। यह इतना भारी होता है कि इसे सामान्य बॉम्बर विमानों से नहीं गिराया जा सकता। इसे श्ण्-१३० हरक्यूलिस जैसे विशेष सैन्य विमान के कार्गो डोर (पिछले दरवाजे) से बाहर धकेला जाता है।
अमेरिका का यह हमला ईरान के पीकेक्स पर्वतीय क्षेत्र में हो सकता है, जहां ईरान की परमाणु सुविधाएं होने की बात कही जाती है। संभव है कि इस भारी-भरकम बम को पहाड़ पर गिराकर अमेरिका ईरान की सैकड़ों फीट नीचे मौजूद परमाणु सुविधा के प्रवेश द्वारों को बंद करने की कोशिश करे।
अगर अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर इस तरह का बम गिराया, तो जवाबी कार्रवाई में ईरान इजरायल को भारी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। यही वजह है कि इजरायल में भी मोबाइल शेल्टर और रक्षा प्रणालियां लगाई जा रही हैं। यहां तक कि यूएई और दूसरे अरब देशों में भी ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) की ओर से बड़े हमले हो सकते हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ईरान की सेना अरब देशों की जमीन पर उतर सकती है। यह ईरान के लिए जीवन-मरण का सवाल होगा। अब ईरान बचेगा या खत्म होगा, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वह आखिरी दम तक जद्दोजहद करेगा।

 

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