-अरुण कुमार गुप्ता
लोकतंत्र में विरोध की आवाज उठाने से पहले क्या नागरिक को यह साबित करना होगा कि वह शांति भंग नहीं करेगा? दिल्ली में छात्र संगठन एआईएसए की अध्यक्ष नेहा बोरा को जारी १०,००० के शांति बॉन्ड नोटिस ने यही सवाल खड़ा कर दिया है। मामला १६ अक्टूबर को हुए ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से जुड़ा है। नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने उन्हें नोटिस जारी कर पूछा कि जांच के दौरान शांति बनाए रखने के लिए उनसे १०,००० का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार क्यों न मांगा जाए। नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि नोटिस बिना पर्याप्त आधार के यांत्रिक तरीके से जारी किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच पूरी होने से पहले बॉन्ड की जरूरत कैसे तय की जा सकती है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने भी पूछा कि क्या जांच पूरी होने से पहले ही बॉन्ड की आवश्यकता मान ली गई है। दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। इस तरह अदालत के सामने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की निवारक शक्तियों के इस्तेमाल का सवाल है। इस मामले में अदालत का फैसला यह स्पष्ट करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर न्यायालय क्या रुख अपनाता है।
पुलिस ने रोका मार्च
सड़क पर लगी ‘जन संसद’
दिल्ली में आज मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी टकराव सड़क पर उतर आया। ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ और संयुक्त किसान मोर्चा ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए और एसआईआर की प्रक्रिया रद्द कर कथित तौर पर हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं। २३ अक्टूबर को दोपहर करीब २ बजे दिल्ली के गोल डाकखाना इलाके से मार्च शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां करीब १०० से १५० लोग जुटे थे। प्रदर्शन में छात्र संगठनों और कार्यकर्ताओं के साथ किसान संगठनों से जुड़े लोगों ने भी भाग लिया। चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और एसआईआर रोकने जैसे नारे लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका तो वे बैठ गए और आयोजकों की घोषणा के मुताबिक ‘जन संसद’ आयोजित की। मध्य दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई और यातायात के लिए वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने १३.४१ करोड़ लोगों के कथित तौर पर मताधिकार से वंचित होने का दावा करते हुए नाम बहाल करने और एसआईआर रद्द करने की मांग उठाई है।
