मुख्यपृष्ठस्तंभगजबे है...३२ हजार पेड़ और सीएम का ‘विजन'...!

गजबे है…३२ हजार पेड़ और सीएम का ‘विजन’…!

एम एम एस

जब भी कोई महान प्रोजेक्ट आता है, तो वह अपने साथ विकास का ऐसा शोर लेकर आता है कि पक्षियों की चहचहाहट और पेड़ों की सांसें उसी शोर में कहीं दबकर दम तोड़ देती हैं। हाल ही में ३२ हजार से ज्यादा पेड़ों की बलि चढ़ाने की योजना को लेकर छिड़े घमासान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पर्यावरण प्रेम और कंक्रीट प्रेम के बीच की जंग में हमेशा कंक्रीट ही भारी पड़ता है। इस महान यज्ञ में जब जनता और पर्यावरणविदों ने ‘पेड़ों की हत्या’ का रोना रोया, तो हमारे हुक्मरानों ने ऐसा मास्टरस्ट्रोक जवाब दिया कि सुनकर आंखें नम और दिल गदगद हो जाएं। श्रीमान मुख्यमंत्री फडणवीस ने बड़ी सहजता से समझा दिया कि भाई, रोने-धोने की क्या जरूरत है? आज जो ३२ हजार पेड़ कट रहे हैं, वे तो बस एक छोटी सी कुर्बानी हैं। आने वाले कल में हम ऐसे २८ करोड़ पेड़ लगाएंगे जो इस प्रोजेक्ट के प्रदूषण को पलक झपकते ही ऐसे गायब कर देंगे जैसे गधे के सिर से सींग!
वाह! इसे कहते हैं गणितीय चमत्कार और भविष्य का विजन। यानी आज की लाशों पर कल के अरमानों का ऐसा शानदार महल खड़ा होगा कि शुद्ध हवा लाइन में लगकर इंतजार करेगी। आम आदमी सोचता था कि पेड़ लगाने के लिए ऑक्सीजन देने वाले, फल देने वाले और छांव देने वाले जीवित पेड़ों को बचाना जरूरी होता है। पर हमारी आधुनिक तकनीक ने यह गुत्थी सुलझा ली है कि पहले पुराने, बुजुर्ग और वफादार पेड़ों को रास्ते से हटाओ, फिर उनकी याद में कागजों पर २८ करोड़ पौधे उगाओ।
वैसे भी, कंक्रीट के जंगलों में एसी की ठंडी हवा खाने वाले आधुनिक नागरिकों को पेड़ों से भला क्या लगाव? पेड़ तो सिर्फ सड़क चौड़ी करने, बुलेट ट्रेन दौड़ाने या बड़े-बड़े मॉल बनाने के रास्ते का कबाड़ा होते हैं। यदि कोई पक्षी अपना घोंसला छोड़कर बेघर हो रहा है, तो उसे यह समझना चाहिए कि वह किसी राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट के रास्ते में रुकावट बन रहा था।
अंत में यही कहेंगे कि हे प्रकृति माता! थोड़ा सब्र रखो। आज तुम्हारी छाती पर जो बुलडोजर चल रहा है, वह कल के स्वर्णिम विकास की नींव है। बस दुआ कीजिए कि वह २८ करोड़ पेड़ों वाला जादुई आंकड़ा सचमुच जमीन पर उतर आए, वरना आने वाली पीढ़ियां शुद्ध हवा की जगह केवल नेताओं के भाषण और विज्ञापनों के होर्डिंग ही सूंघने को मजबूर होंगी!

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