मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : वोटर लिस्ट पर सवाल, सॉफ्टवेयर पर पर्दा!

पटना की पॉलिटिक्स : वोटर लिस्ट पर सवाल, सॉफ्टवेयर पर पर्दा!

अरुण कुमार गुप्ता
बिहार की राजनीति से उठी मतदाता सूची की बहस अब एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए। खड़गे ने दावा किया कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने पर चुनाव आयोग ने ‘ट्रेड सीक्रेट’ का हवाला दिया। खड़गे ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से तीन प्रमुख मांगें दोहरार्इं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर प्रक्रिया पर तत्काल रोक और मतदाता सूची से कथित तौर पर अवैध तरीके से हटाए गए नामों की बहाली। उन्होंने भविष्य के चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी की। कांग्रेस अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश में १६.१८ लाख फॉर्म-६ आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं होने और पीलीभीत में १०,४७० मतदाताओं के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया।
अनंत सिंह का नया दांव!
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने अपनी अलग पार्टी बनाने की घोषणा की है। इस फैसले ने बिहार की राजनीति में एक नई संभावना जरूर पैदा की है, लेकिन क्या यह कदम राज्य की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला सकेगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में विधान परिषद चुनाव से जुड़ा विवाद है। उन पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करने का आरोप लगा। जेडीयू ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की। इस घटनाक्रम के बाद अनंत सिंह का अपनी पार्टी बनाने का एलान महज संगठनात्मक पैâसला नहीं, बल्कि जेडीयू नेतृत्व से अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, नई पार्टी की औपचारिक घोषणा, गठन की प्रक्रिया और संगठनात्मक ढांचे की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
अनंत सिंह का नया दांव!
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच टकराव ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने अपनी अलग पार्टी बनाने की घोषणा की है। इस पैâसले ने बिहार की राजनीति में एक नई संभावना जरूर पैदा की है, लेकिन क्या यह कदम राज्य की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला सकेगा, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा। अनंत सिंह के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई की पृष्ठभूमि में विधान परिषद चुनाव से जुड़ा विवाद है। उन पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करने का आरोप लगा। जेडीयू ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए कार्रवाई की। इस घटनाक्रम के बाद अनंत सिंह का अपनी पार्टी बनाने का एलान महज संगठनात्मक पैâसला नहीं, बल्कि जेडीयू नेतृत्व से अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, नई पार्टी की औपचारिक घोषणा, गठन की प्रक्रिया और संगठनात्मक ढांचे की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

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