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भीमाशंकर के जंगलों को बचाने की लड़ाई शुरू हो गई है… आदित्य ठाकरे मैदान में!.. पेड़ों को बचाने के लिए प्राणों की बाजी लगा देंगे

सामना संवाददाता / मुंबई

गुजरात की टोरेंट कंपनी के लिए ढाई लाख पेड़ों को काटने का फरमान जारी करने वाली फडणवीस सरकार के खिलाफ गुस्से का विस्फोट हुआ है। कर्जत-भीमाशंकर के जंगलों को बचाने की लड़ाई तेज हो गई है। शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे इस लड़ाई के लिए खुद मैदान में उतरे और सीधे साय पहाड़ी पर पहुंच गए।
फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह सरकार महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाने पर तुली है। उन्होंने सवाल उठाया कि आप मेगावाट बना रहे हैं या महाराष्ट्र की मेगा वाट लगा रहे हैं? आदित्य ठाकरे ने हुंकार भरते हुए कहा कि मौत भी आ जाए तो मंजूर है, लेकिन पेड़ों को बचाने के लिए जान की बाजी लगा देंगे। यह लड़ाई अब नहीं रुकेगी। उनकी इस हुंकार के बाद कर्जत-भीमाशंकर के ग्रामीणों ने भी एकजुट होकर आर-पार की लड़ाई का संकल्प लिया।
रायगढ़ और पुणे जिलों की ५७६ एकड़ जंगल की जमीन को तबाह करके गुजरात की टोरेंट पावर कंपनी के हवाले करने की साजिश रची जा रही है। तीन हजार मेगावाट के इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग ढाई लाख पेड़ काटे जाएंगे। इसके लिए कर्जत के साय पहाड़ी इलाके में बड़े-बड़े पेड़ों पर धारदार आरे चलाए जा रहे हैं। जब ग्रामीणों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई, तो सुरक्षा गार्डों का घेरा बनाकर उनके जंगल में प्रवेश करने पर ही रोक लगा दी गई। इस तानाशाही के खिलाफ शिवसेना ने जंग का बिगुल फूंक दिया। शिवसेना नेता और विधायक आदित्य ठाकरे के साथ शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत और उपनेता सुषमा अंधारे सीधे कर्जत की साय पहाड़ी पहुंचे और पेड़ों की कटाई का जायजा लिया।
राज्य में सूखा, लेकिन मुख्यमंत्री बन गए हैं ‘लकड़हारे‘
शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने साफ कहा कि हमारा विकास से कोई विरोध नहीं है और न ही कंपनी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी है। विकास बिल्कुल होना चाहिए, लेकिन महाराष्ट्र को बेचकर किया गया विकास मंजूर नहीं होगा। यहां के जंगलों को नष्ट करके विकास नहीं हो सकता। उन्होंने गुस्से में सवाल किया कि जब राज्य के कई हिस्सों में पानी की किल्लत और सूखे जैसे हालात का संकट है, तब मुख्यमंत्री लकड़हारे की भूमिका निभा रहे हैं। आप मेगावाट बनाएंगे या महाराष्ट्र की मेगा वाट लगाएंगे?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि टोरेंट प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले फेक नरेटिव फैला रहे हैं। इस पर पलटवार करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि फेक नरेटिव वैâसे बनाया जाता है, यह फडणवीस को अपने चहेतों द्वारा की गई ५०० करोड़ रुपये की चर्चा से सीखना चाहिए। मुख्यमंत्री इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों को महाराष्ट्रद्रोही कह रहे हैं। वे अर्बन नक्सल जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते रहेंगे, लेकिन सच्चाई यह है कि महाराष्ट्र के जंगलों, वनों और आदिवासी बस्तियों को तबाह करने वाले मुख्यमंत्री खुद महाराष्ट्रद्रोही हैं।
राजस्थान का चिपको आंदोलन याद करें
आदित्य ठाकरे ने राजस्थान के लोगों द्वारा जंगल बचाने के लिए किए गए चिपको आंदोलन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां की जनता ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी से लड़ाई लड़ी। वैसी ही लड़ाई यहां लड़ने की जरूरत है। जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं है, बल्कि यह पानी, खेती, जैव विविधता और स्थानीय लोगों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए साय डोंगरीr का जंगल बचाने के लिए नागरिकों को एकजुट होकर दृढ़ संकल्प लेना चाहिए।
आरे मेट्रो कारशेड के समय काटे गए पेड़ कहां लगाए गए?
आदित्य ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि साय डोंगरी पर पेड़ काटने के बदले ९० हजार पेड़ लगाए जाएंगे। तो फिर आरे मेट्रो कारशेड के लिए पेड़ काटने के बाद उनके बदले में पेड़ कहां लगाए गए और क्या वे जीवित बचे? यह जाकर देखना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांदिवली में मैंग्रोव काटकर उसके बदले चंद्रपुर में पेड़ लगाने की बात मुख्यमंत्री करते हैं, जबकि चंद्रपुर में तो टाइगर कॉरिडोर को ही नष्ट किया जा रहा है। पिछले साल मुंबई क्लाइमेट वीक में मुख्यमंत्री ने ३०० करोड़ पेड़ लगाने का दावा किया था। ३०० करोड़ पेड़ लगाने का मतलब क्या आप किसी को खोखे दे रहे हैं? वे पेड़ कहां लगाएंगे? और अगर नए पेड़ ही लगाने हैं, तो पहले से मौजूद पेड़ों को क्यों काट रहे हैं? कितना भी नया प्लांटेशन कर लें, नष्ट हुए पेड़ों की असली कीमत वापस नहीं आ सकती।
केंद्र में रिजीम चेंज होकर रहेगा; पाप करने वाले अधिकारियों को जेल भेजेंगे
आदित्य ठाकरे ने भरोसा जताया कि देश में जल्द ही सत्ता परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा कि जब-जब शासक बेकाबू और निरंकुश होते हैं, तब-तब जनता सड़कों पर उतरती है। अमेजन के जंगल तबाह करने वाली ब्राजील सरकार के खिलाफ वहां की जनता सड़कों पर उतरी और वहां सत्ता परिवर्तन हुआ। सर्बिया में छात्रों ने आंदोलन करके सरकार बदल दी। हमारे देश में भी शासन जनता के खिलाफ इतने भयानक तरीके से काम कर रहा है कि अब जनता ही इस राज को बदल देगी। अगले ३-४ महीनों में केंद्र में सत्ता परिवर्तन होगा, और जिन अधिकारियों ने पाप किए हैं, उन्हें किस जेल की कोठरी में भेजना है, यह हम तय करेंगे।
इस अवसर पर शिवसेना के उपजिलाप्रमुख नितिन सावंत, तालुकाप्रमुख बाजीराव दलवी, जिला परिषद सदस्य सुनीता मोरे, पूर्व नगर अध्यक्ष व वर्तमान सदस्य सुवर्णा जोशी, उत्तम कोलंबे, एडवोकेट संपत हड़प सहित बड़ी संख्या में शिवसैनिक और ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने सुनाई आपबीती
आदित्य ठाकरे के आने की खबर मिलते ही आसपास के इलाकों से सैकड़ों ग्रामीण साय पहाड़ी पर एकत्र हो गए। उन्होंने आदित्य ठाकरे के सामने सरकार की दमनकारी नीतियों का दुखड़ा रोया। ग्रामीणों ने बताया कि जब हम अधिकारियों से प्रोजेक्ट के दस्तावेज दिखाने को कहते हैं, तो वे कोई जवाब नहीं देते। धोखाधड़ी चल रही है। इस प्रोजेक्ट में पारदर्शिता न होने के कारण हमारी ग्राम पंचायतों ने प्रस्ताव पारित किया है कि हम काम नहीं होने देंगे, फिर भी पुलिस सुरक्षा लाकर तानाशाही की जा रही है। ग्रामीण डरे हुए हैं। आदित्य ठाकरे ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा कि डरिए मत, शिवसेना आपके साथ खड़ी है। आपको लालच दिए जाएंगे, अगर आप नहीं झुके तो मुकदमे दर्ज किए जाएंगे, जेल में डाला जाएगा, लेकिन अब प्राण भी चले जाएं तो मंजूर है… यह लड़ाई अब नहीं रुकेगी।

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