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राज्य में सूखाग्रस्त स्थिति के बीच पानी की घोर बर्बादी!

-मीरा-भायंदर में ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ योजना फाइलों में सिमटी
सुरेश गोलानी / मुंबई
एक तरफ जहां पूरा राज्य सूखा और भीषण जल संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मीरा-भायंदर मनपा क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही के कारण हर साल करोड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किए जाने के बावजूद मनपा की उदासीनता के चलते स्थानीय स्तर पर यह योजना सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है।
गौरतलब है कि शहर में तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण और अवैध निर्माण के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, लेकिन मनपा प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। बिल्डर्स और विकासक केवल नई इमारतों का अधिभोग प्रमाणपत्र (ऑक्युपैंसी सर्टिफिकेट-ओसी) हासिल करने के लिए दिखावे के तौर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग खड़ा कर देते हैं। लेकिन ‘ओसी’ मिलने के बाद वह सिस्टम चालू है भी या नहीं, इसकी जांच करने की फुर्सत मनपा के संबंधित विभागों को नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता धीरज परब द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष २००९ से २०२३ के बीच मनपा ने कुल ५५७ आरडब्ल्यूएच योजनाओं को मंजूरी दी थी। नियमों के मुताबिक, हर साल इन योजनाओं के कार्यान्वयन की भौतिक जांच और नूतनीकरण होना अनिवार्य है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष २०२३-२४ में ५५७ में से केवल १३ का ही नूतनीकरण हुआ है। आरडब्ल्यूएच के ताजा आंकड़ों पर अनिश्चितता कायम है।
यह लापरवाही तब हो रही है, जब शहर में पहले से ही १० से २० प्रतिशत तक पानी की कटौती लागू है। एड. प्रवीण परमार का कहना है कि मनपा के आंकड़ों के मुताबिक शहर में औसतन २,९०० मिमी बारिश होती है। यदि इसे २,५०० मिमी भी मान लिया जाए तो सिर्फ इन स्वीकृत ५५७ आरडब्ल्यूएच योजनाओं से ही सालाना ८४ करोड़ लीटर पानी बचाया जा सकता था। इस मामले को लेकर परब और परमार ने मनपा प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परमार ने अपनी मांग में स्पष्ट किया है कि मनपा तुरंत भूजल सर्वेक्षण और विकास एजेंसी (जीएसडीए) से शहर के भीतर भूजल स्तर और समुद्री खारे पानी के रिसाव (सेलाइन इन्ग्रेस) का तकनीकी मूल्यांकन प्राप्त करे। इसके साथ ही पानी के वितरण नेटवर्क का ‘वॉटर ऑडिट’ पूरा कर उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि चोरी और लीकेज के कारण बर्बाद होने वाले पानी का सच जनता के सामने आ सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ३० दिनों के भीतर इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाएंगे।
फैक्ट चेक : मुख्य आंकड़े व मांगें
-भीषण संकट- राज्य में सूखाग्रस्त स्थिति के बीच शहर में १० से २० फीसदी पानी की कटौती
-५५७- वर्ष २००९ से २०२४ बीच मनपा द्वारा मंजूर कुल
-१३ – वर्ष २०२३-२४ में कुल सक्रिय और रिन्यूअल कराए गए आरडब्ल्यूएच प्रोजेक्ट
-८४ करोड़ लीटर- सूखाग्रस्त शहर में सालाना बर्बाद हो रहा पानी
-४ से ५ दिन- पूरे मीरा-भायंदर शहर को मिलने वाले अतिरिक्त पानी की अवधि
प्रमुख मांगें- जीएसडीए द्वारा जमीन में बढ़ रहे समुद्री खारे पानी की जांच और वॉटर ऑडिट

 

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