-एनसीएलटी-एनसीएलएटी की भर्ती और स्वायत्तता पर तीखी टिप्पणी
-अध्यक्षों से कर्मचारी व संसाधन जरूरतों का मांगा प्रस्ताव
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण और उसके अपीलीय न्यायाधिकरण की प्रशासनिक व्यवस्था पर कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की पकड़ को लेकर असाधारण रूप से तीखी टिप्पणी की है। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मंत्रालय ने भर्ती प्रक्रिया को ‘पूरी तरह हाइजैक’ कर लिया है, जिससे न्यायाधिकरण की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है।
संविदा कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत को बताया गया कि मंत्रालय ने छह अक्टूबर को भारत में काम करने वाली एक विदेशी कंपनी को डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार और स्टेनोग्राफर सहित प्रशासनिक कर्मचारी उपलब्ध कराने का ठेका दिया। मंत्रालय का औपचारिक विस्तृत उत्तर अभी आदेश के सार्वजनिक विवरण में सामने नहीं आया है।
अदालत ने एनसीएलटी और एनसीएलएटी के अध्यक्षों से कर्मचारियों, ढांचे और प्रशासनिक सहायता की वास्तविक जरूरतों का प्रस्ताव देने को कहा। पीठ ने अंतरिम उपाय के रूप में अनुभवी सरकारी अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति और चरणबद्ध नियमित भर्ती का संकेत भी दिया।
दिवालिया कंपनियों, बैंकों और हजारों करोड़ रुपए के दावों पर पैâसला करने वाला न्यायाधिकरण यदि अपने कर्मचारियों के लिए मंत्रालय पर निर्भर हो, तो निष्पक्षता केवल आदेश में नहीं-प्रशासनिक ढांचे में भी सिद्ध करनी पड़ेगी।
