-सूफी खान
-अब कैसे आगे बढ़ेगी दोस्ती?
अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में ट्रंप की पार्टी की करारी शिकस्त और डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अल सैय्यद की जीत से अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को भी गहरा झटका लगा है। ट्रंप की हार से इजरायल की चिंता बढ़ गई है। अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद इजरायल में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि ये नतीजे उसके लिए कितने नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। इजरायली मीडिया में चर्चा है कि अमेरिकी चुनाव में उन लोगों को भी जीत मिली है, जो इजरायल की नीतियों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा मिशिगन से सीनेटर चुने गए अब्दुल अल सैय्यद की हो रही है।
मीडिया में कहा जा रहा है कि इजरायल के लिए बुरी खबरों का दौर थम नहीं रहा है। एक तरफ इजरायल में बनने वाली सरकार को अरब पार्टियों का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने देश की मुश्किलों और दुश्वारियों के लिए इजरायल को ही जिम्मेदार ठहराया है। यह इजरायल समर्थक अमेरिकी लॉबी के लिए भी खतरे की घंटी है। खुद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का संदेश था कि अमेरिका इजरायल के बहुत करीब चला गया था, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा। इजरायल में इस बात का डर भी है कि अमेरिका के साथ उसके भविष्य के रिश्ते अब दांव पर लग सकते हैं। अमेरिका इजरायल का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी है। इसके साथ ही हर साल मिलने वाली अरबों डॉलर की अमेरिकी सैन्य सहायता पर भी संकट के बादल मंडरा सकते हैं। वहीं इजरायल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आलोचना भी हो रही है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति पर सबसे ज्यादा निर्भर रहने वाले इजरायली प्रधानमंत्रियों में शामिल हो गए थे। अब इजरायल में इस बात पर मंथन चल रहा है कि अमेरिकी जनमत में बदलाव के साथ ही वहां के डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, दोनों दलों में इजरायल के लिए राजनीतिक समर्थन कमजोर हुआ है। खासतौर पर गाजा युद्ध के दौरान इजरायल के साथ अमेरिका की बढ़ती भागीदारी को अमेरिकी जनता ने नकार दिया है।
अमेरिकी मीडिया भी कह रहा है कि ईरान के साथ जंग के दौरान अमेरिका में इजरायल विरोधी भावना और मजबूत हुई। अमेरिकी मतदाताओं के एक वर्ग का मानना था कि अमेरिका और इजरायल का मिलकर ईरान पर हमला करना ऐसा फैसला था, जो अमेरिका को नहीं लेना चाहिए था। इस वर्ग का आरोप था कि नेतन्याहू ने ट्रंप को इस हमले में शामिल होने के लिए राजी किया था।
इजरायली मीडिया को इस बात की भी चिंता सता रही है कि अमेरिका में रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, इजरायल ने हमेशा दोनों दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की और यह दबाव बनाए रखा कि इजरायल की रक्षा करना और उसके अस्तित्व को बचाए रखना कितना जरूरी है। लेकिन प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने केवल रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन करके इस पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। लंबे समय तक अमेरिका में इजरायल को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों पार्टियों का समर्थन हासिल रहा था। इजरायल इसे अपनी बड़ी रणनीतिक ताकत मानता था।
