मुख्यपृष्ठनए समाचारशोर मचाया तो निर्माण बंद अफसरों की भी खैर नहीं!

शोर मचाया तो निर्माण बंद अफसरों की भी खैर नहीं!

-मुंबई में निर्माण स्थलों के ध्वनि प्रदूषण पर हाई कोर्ट सख्त; १०० डेसिबल से अधिक शोर की शिकायत
-बीएमसी को पूरे शहर की निगरानी का निर्देश
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में निर्माण और पुनर्विकास परियोजनाओं के शोर से परेशान नागरिकों का मुंबई हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि प्रदूषण होने पर निर्माण कार्य रोकना होगा। महानगरपालिका और पुलिस को नियमित निगरानी करनी होगी। नियमों का पालन कराना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं। मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ माहिम निवासी डॉ. अशोक पाठारे की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने पड़ोस में चल रहे पुनर्विकास कार्य से अत्यधिक शोर की शिकायत की थी। पुलिस की जांच में निर्माण स्थल पर शोर १०० डेसिबल से अधिक दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय सामान्य निर्धारित सीमा ५५ डेसिबल है। अदालत ने बीएमसी को मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त करने और नियमित निगरानी करने को कहा। नियमों के उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई होगी। संबंधित बिल्डर को ध्वनि प्रदूषण नियमों के पालन का लिखित आश्वासन देना होगा, तभी रुका हुआ निर्माण दोबारा शुरू हो सकेगा।

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