– कीनन-रूबेन हत्याकांड में मुख्य दोषी की उम्रकैद घटाकर २० साल की गई
– दो अन्य हत्या के आरोप से बरी, मामूली चोट पहुंचाने की सजा बरकरार
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई को झकझोर देने वाले कीनन-रूबेन दोहरे हत्याकांड में १५ साल बाद मुंबई हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण पैâसला सुनाया है। महिला मित्रों से छेड़छाड़ का विरोध करने पर दो युवकों की बेरहमी से हत्या के इस चर्चित मामले में अदालत ने मुख्य दोषी जितेंद्र राणा की हत्या के अपराध में दोषसिद्धि बरकरार रखी, लेकिन उसकी उम्रवैâद को घटाकर २० वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया। वहीं दो अन्य आरोपियों सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया है। हालांकि मामूली चोट पहुंचाने के अपराध में उनकी दोषसिद्धि और एक वर्ष की सजा बरकरार रखी गई है। गुरुवार, पांच नवंबर को न्यायमूर्ति मकरंद एस. कार्णिक और न्यायमूर्ति संदेश एस. पाटील की खंडपीठ ने वर्ष २०१६ में विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर निर्णय दिया।
पांच मई २०१६ को विशेष अदालत ने जितेंद्र राणा, सतीश दुलगज, सुनील बोथ और दीपक पिवाल को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। चारों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अपील लंबित रहने के दौरान सतीश दुलगज की मृत्यु हो गई। हाई कोर्ट ने मुख्य दोषी जितेंद्र राणा के खिलाफ हत्या का अपराध साबित माना। हालांकि घटना के समय उसकी उम्र लगभग २५ वर्ष होने सहित विभिन्न परिस्थितियों पर विचार करते हुए सजा २० वर्ष के कठोर कारावास तक सीमित कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में सजा की वैधानिक छूट नहीं मिलेगी।
महिला मित्रों की इज्जत बचाने की कीमत जान देकर चुकाई!
यह घटना २० अक्टूबर २०११ की रात अंधेरी-पश्चिम के आंबोली इलाके में हुई थी। कीनन सैंटोस (२४) और रूबेन फर्नांडिस (२९) अपने दोस्तों के साथ एक रेस्तरां में भारत-इंग्लैंड क्रिकेट मैच देखने गए थे। रात करीब साढ़े दस बजे रेस्तरां से निकलते समय कुछ लोगों ने उनकी महिला मित्रों पर अश्लील टिप्पणियां कीं और कथित तौर पर एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कीनन और उनके दोस्तों ने इसका विरोध किया। कहासुनी और हाथापाई के बाद आरोपी वहां से चले गए, लेकिन कुछ देर बाद चाकू और डंडे लेकर लौटे। इसके बाद हुए हमले में कीनन के पेट में कई बार चाकू मारा गया। उसी रात उनकी मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल रूबेन ने ३१ अक्टूबर २०११ को अस्पताल में दम तोड़ दिया।
