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कुछ बोलबे का..!…मंत्री गालियां दें और राम-कृष्ण में फूट डाली जाए अराजकता फैला कौन रहा है?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
विपक्ष सवाल पूछे तो अराजकता, मंत्री गालियां दें और राम-कृष्ण में फूट डालने वाली बातें हों तो सब चंगा सी! भिया, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि कांग्रेस और `इंडिया’ गठबंधन देश के महान लोकतंत्र को अराजकता और अस्थिरता की आग में झोंकने का प्रयास कर रहे हैं! ई का बोलत बा?
केंद्र में बारह साल से अधिक समय से भाजपा की सरकार है। उत्तर प्रदेश में भी करीब दस साल से भाजपा सत्ता में है। फिर अपने ही शासनकाल में लोकतंत्र बचाने की दुहाई किससे? गाजियाबाद में मुख्यमंत्री खुद `लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा निकाल रहे हैं!
भाजपाई गली गली, शहर शहर सड़कें बंद करवा कर रैली निकलवा रहे हैं। अब व्यापारियों का नुकसान नहीं हो रहा है।
वाह भिया, गजबे हो गइल!
विपक्ष चुनाव आयोग से सवाल पूछे तो अराजकता! राहुल गांधी प्रधानमंत्री को बहस का आमंत्रण दें तो `चिरकुट’! उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पीडीए का मतलब `पापी, धोखेबाज और अपराधी’ बताएं!
अरे भिया, ई कौन-सी लोकतांत्रिक मर्यादा है?
और योगीजी, जरा अपने घोषित सनातनी कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तरफ भी देखिए!
राम और कृष्ण बांट रहे हैं। उनकी विवादास्पद टिप्पणियों पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर राम और कृष्ण में फूट डालने वाली बातें समाज में कौन-सी स्थिरता पैदा कर रही हैं? भगवा चोला पहनकर ऐसी बातें करने वालों पर आपकी चुप्पी क्यों है? आप भगवा उतार दिए हैं क्या?
विपक्ष के राजनीतिक सवालों में आपको देश की अस्थिरता दिखाई देती है, लेकिन धार्मिक भावनाओं को बांटने वाली बयानबाजी पर वैसी चिंता क्यों नहीं दिखाई देती?
भिया, देश देख रहा है कि कौन किस भाषा में बोल रहा है!
एक तरफ पूरी भाजपा राहुल गांधी पर दिन-रात राजनीतिक हमले करती है। दूसरी तरफ शिकायत करती है कि विपक्ष लोकतंत्र को अस्थिर कर रहा है!
अरे भिया, शब्दों के थप्पड़ खुद चलाओ और फिर लोकतंत्र के घायल होने का रोना भी खुद रोओ!
लोकतंत्र केवल सत्ता पक्ष की सुविधा का नाम नहीं है। सवाल पूछना, असहमति जताना और जवाब मांगना भी लोकतंत्र है। कुछ बोलबे का… कि विपक्ष के सवाल अराजकता और अपने लोगों की बदजुबानी लोकतांत्रिक संस्कार हो गइल बा?

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