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हाऊऊऊऊ : सात सौ साल से घरों की पुताई नहीं, दिवाली पर भी नहीं बदलता नियम!

-एम एम एस

मध्य प्रदेश के कछालिया गांव में दिवाली का ऐसा अनोखा रिवाज है कि रंग-रोगन करनेवाले भी हैरान रह जाएं! यहां लगभग सात सौ साल पुरानी परंपरा के अनुसार कई परिवार अपने घरों की रंगाई-पुताई नहीं कराते। त्योहार आता है, साफ-सफाई होती है, पूजा की तैयारी होती है, लेकिन दीवारों पर नया रंग चढ़ाने की परंपरा नहीं है। ग्रामीण इस रीति को अपनी पुरखों की मान्यता से जोड़ते हैं। भैया, जहां शहरों में दिवाली से पहले पेंटरों की बुकिंग मिलना मुश्किल हो जाती है, वहीं इस गांव में मामला बिल्कुल उलटा है। यहां घर की चमक नए पेंट से नहीं, पुरानी परंपरा निभाने से जुड़ी है। आधुनिकता के दौर में भी गांववालों ने अपने पूर्वजों की मान्यता को जीवित रखा है। अब इसे आस्था कहिए या अनोखी परंपरा, चर्चा तो खूब हो रही है!
चार महीने बाद नदी पर लौटा पुल,
अब १२० किलोमीटर का चक्कर खत्म!
मध्य प्रदेश के मुरैना में चंबल नदी पर पिनाहट-उसैद घाट का पेंटून पुल चार महीने बाद फिर शुरू हो गया है। इसके खुलने से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती गांवों के लोगों को बड़ी राहत मिली है। आगरा जाने वालों का करीब १२० किलोमीटर और ग्वालियर जाने वालों का लगभग १५० किलोमीटर का अतिरिक्त सफर बच सकेगा। भैया, सोचिए, नदी पार करने के लिए लोग महीनों तक इतना लंबा चक्कर काट रहे थे कि रास्ते में पेट्रोल और समय दोनों का बजट बिगड़ जाता था! अब अस्थायी पुल लौट आया है तो यात्रियों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि, पेंटून पुल का संचालन नदी के जलस्तर और सुरक्षा परिस्थितियों पर निर्भर करता है। फिलहाल, गांववालों के लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि सामने दिखने वाली मंजिल तक पहुंचने के लिए अब लंबा घूमना नहीं पड़ेगा!
भोपाल में ८०० कचरा गाड़ियां खड़ीं,
सड़कों पर ९०० टन कूड़े का पहाड़!
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल ने नगर निगम की व्यवस्था की पोल खोल दी है। पांच नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, आठ सौ से ज्यादा कचरा वाहन खड़े रहे और शहर की सड़कों पर लगभग नौ सौ टन कचरा जमा होने की स्थिति बन गई। अब भैया, जिस राजधानी को साफ-सुथरा रखने के लिए रोज गाड़ियां दौड़ती हैं, वहां गाड़ियां ही आराम फरमाने लगें तो कूड़ा कहां जाएगा? शहरवासियों की परेशानी बढ़ रही है और त्योहार के मौके पर सफाई व्यवस्था का संकट अलग खड़ा हो गया है। कर्मचारियों की मांगों का समाधान और शहर की सफाई दोनों जरूरी हैं। फिलहाल, राजधानी का हाल ऐसा है कि कचरा उठानेवाली गाड़ियां खड़ी हैं और कूड़ा अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं!
छत्तीसगढ़ के गांव में दिवाली एक हफ्ते पहले, भगवान के सपने से बदल गया कैलेंडर!
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सेरमा गांव में दिवाली का कैलेंडर बाकी देश से अलग चलता है। यहां ग्रामीण मुख्य दीपावली से लगभग एक सप्ताह पहले ही त्योहार मना लेते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, वर्षों पहले गांव के आराध्य सिरदार देव ने मुखिया को सपने में दर्शन देकर त्योहार पहले मनाने का निर्देश दिया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। गांव में उत्सव और मेले जैसा माहौल रहता है। भैया, देशभर में लोग पंचांग देखकर दिवाली की तारीख तय करते हैं, लेकिन इस गांव के पूर्वजों ने ऐसी परंपरा बनाई कि त्योहार ही पहले आ जाता है! हालांकि, धार्मिक आयोजन में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की परंपरा भी बताई जाती है, जिस पर समान भागीदारी का सवाल उठता है। कुल मिलाकर सेरमा की दिवाली अपने अनोखे कैलेंडर के कारण चर्चा में है!
मुर्गों की लड़ाई में बीस लाख का जुआ,
जंगल में पहुंचीं ४७ कारें!
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में मुर्गों की लड़ाई की आड़ में कथित जुआ खेलने का ऐसा मामला सामने आया कि पुलिस भी बड़ी संख्या देखकर चौंक गई। भद्रकाली थाना क्षेत्र के रायगुड़ा गांव के पास जंगल में पुलिस ने छापेमारी करके १५६ लोगों को पकड़ा। मौके से २० लाख १ हजार २०० रुपये नकद, ४७ कारें और १२ मोबाइल फोन जब्त किए जाने की खबर है। भैया, मुर्गों की लड़ाई देखने के नाम पर जंगल में इतनी गाड़ियां पहुंच गर्इं कि मानो कोई बड़ा मेला लगा हो! पुलिस के मुताबिक, वहां जुए का आयोजन किया जा रहा था। अब जब्त रकम और वाहनों की जांच के साथ आयोजकों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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